नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई, क्योंकि उसने हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्कों के नियंत्रण से जुड़ी याचिका पर अब तक अपना हलफनामा दाखिल नहीं किया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकार एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करे और देरी के कारणों को भी रिकॉर्ड में रखे।
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि केंद्र सरकार ने अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले ही तीन बार समय दिया जा चुका है, इसके बावजूद हलफनामा दाखिल नहीं किया गया।
केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए और समय की मांग की। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि सरकार अपना हलफनामा दाखिल करे तथा सभी तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखे। अदालत ने निर्देश दिया कि हलफनामा अगले शुक्रवार यानी 8 मई तक हर हाल में दाखिल किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत नियामक संस्था का गठन किया जाए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी एयरलाइंस बिना किसी ठोस कारण के किराए और अतिरिक्त शुल्कों में मनमानी कर रही हैं। साथ ही, इकोनॉमी क्लास में मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी गई है, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
इससे पहले भी अदालत हवाई किराए में अचानक वृद्धि को लेकर चिंता जता चुकी है। जनवरी में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने त्योहारों के समय किराए में भारी बढ़ोतरी को ‘शोषण’ करार दिया था और केंद्र सरकार के साथ-साथ विमानन महानिदेशालय तथा हवाईअड्डा आर्थिक नियामक प्राधिकरण से जवाब मांगा था।
अब अदालत के सख्त रुख के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार तय समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखती है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: हवाई किराए पर जवाब न देने पर केंद्र सरकार को फटकार
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