HomeHealth & Fitnessजड़ी-बूटी दिवस पर बोले स्वामी चिदानन्द, प्रकृति है जीवन का आधार

जड़ी-बूटी दिवस पर बोले स्वामी चिदानन्द, प्रकृति है जीवन का आधार

  • जड़ी-बूटियाँ, औषधियाँ ही नहीं, ऋषियों की जीवित चेतना और प्रकृति का अमृत प्रसाद हैं: चिदानन्द सरस्वती

हरिद्वार/ऋषिकेश। आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस के पावन अवसर पर आयोजित ‘जड़ी-बूटी दिवस’ समारोह में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर, स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज, योगऋषि स्वामी रामदेव जी, आचार्य बालकृष्ण तथा स्वामी अभिरामाचार्य महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने भारतीय ज्ञान परम्परा, आयुर्वेद, योग और प्रकृति संरक्षण के संदेश को नई ऊर्जा प्रदान की। समारोह में औषधीय पौधों के संरक्षण, वृक्षारोपण, आयुर्वेद के संवर्धन तथा स्वस्थ एवं प्रकृति-सम्मत जीवनशैली के प्रति जनजागरण का आह्वान किया गया। 

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने आचार्य बालकृष्ण जी को उनके 54 वें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनका सम्पूर्ण जीवन भारतीय ऋषि-परम्परा, आयुर्वेद, वनौषधियों और प्रकृति के प्रति समर्पित साधना का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार योग ने विश्व को भारत की आध्यात्मिक शक्ति से परिचित कराया, उसी प्रकार आयुर्वेद ने मानवता को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की दिशा प्रदान की है।

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स्वामी जी ने कहा, ’जड़ी-बूटियाँ, शरीर की औषधि के साथ धरती माँ की करुणा का साकार स्वरूप हैं। प्रत्येक औषधीय पौधा हमें यह स्मरण कराता है कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं, हमारा संबंध है; उपयोग की वस्तु नहीं, बल्कि उपासना का विषय है। स्वामी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति में तुलसी, नीम, बेल, पीपल, गिलोय, अश्वगंधा जैसी असंख्य वनौषधियाँ केवल वनस्पति ही नहीं, जीवनदायिनी शक्ति है। यदि प्रत्येक परिवार अपने घर, विद्यालय, आश्रम और ग्राम में औषधीय पौधों का रोपण एवं संरक्षण करे, तो हरियाली के साथ स्वास्थ्य, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का एक बेहतर विकल्प भी होगा।

उन्होंने कहा, धरती की चिकित्सा और मानव की चिकित्सा अलग-अलग नहीं हैं। जब मिट्टी स्वस्थ होगी, तब अन्न स्वस्थ होगा; जब जल शुद्ध होगा, तब जीवन स्वस्थ होगा; और जब वनस्पतियाँ सुरक्षित होंगी, तभी मानवता सुरक्षित होगी। स्वामी रामदेव महाराज ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन ऋषि परम्परा का अमूल्य उपहार है। आचार्य बालकृष्ण जी ने आयुर्वेद और भारतीय ज्ञान परम्परा के पुनर्जागरण में अतुलनीय योगदान दिया है। उन्होंने दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण, शोध, प्रामाणिक आयुर्वेदिक ग्रंथों के पुनर्प्रकाशन और आयुर्वेद को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका कार्य स्वस्थ, प्राकृतिक और संतुलित जीवनशैली की दिशा में विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है।

इस अवसर पर योग, आयुर्वेद, पर्यावरण संरक्षण तथा मानवता के कल्याण के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया। स्वामी ने आचार्य बालकृष्ण जी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, निरंतर साधना और लोककल्याणकारी सेवाओं की मंगलकामना दी।

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