लखनऊ। रामकृष्णवचनामृत पर अपने रविवारीय साप्ताहिक प्रवचन में स्वामी मुक्तिनाथानंद ने बताया कि सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु ने अब तक नौ अवतार लिए हैं और दसवां अवतार ‘कल्कि’ अभी होना शेष है। कल्कि को युगावतार,अंतिम अवतार और धर्म-संस्थापक कहा गया है। भागवत पुराण, विष्णु पुराण और कल्कि पुराण में इनके अवतरण का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह अवतार केवल कथा नहीं, बल्कि कलियुग के अंत और सत्ययुग के आरंभ का आध्यात्मिक आश्वासन है। स्वामी ने कल्कि अवतार क्यों? पर चर्चा करते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं—’यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत’। जब-जब धर्म का ह्रास और अधर्म का उत्थान होता है, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। कलियुग की विशेषता है—असत्य, हिंसा,लोभ, कपट और स्वार्थ का बोलबाला। पुराणों के अनुसार कलियुग के अंतिम चरण में राजा प्रजा का शोषण करेंगे, धर्म केवल नाम का रह जाएगा, मनुष्य की आयु, स्मृति और शक्ति क्षीण हो जाएगी। चारों ओर अराजकता, भ्रष्टाचार और पाप का साम्राज्य होगा। तब मानवता को बचाने और धर्म को पुनः स्थापित करने के लिए भगवान विष्णु ‘कल्कि’ रूप में प्रकट होंगे। स्वामी ने कल्कि अवतार कब और कहां होगा अवतरण? के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि कल्कि पुराण के अनुसार कलियुग के अंत में, जब पृथ्वी पर पाप अपने चरम पर होगा, तब संभल नामक ग्राम में विष्णुयश नामक ब्राह्मण के घर कल्कि का जन्म होगा। उनकी माता का नाम सुमति होगा। वे देवदत्त नामक श्वेत अश्व पर आरूढ़ होकर, हाथ में चमकती तलवार लेकर अधर्म का नाश करेंगे।
कल्कि अवतार, धर्म की पुनर्स्थापना का संकल्प : स्वामी मुक्तिनाथानंद
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