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  • गुरुग्राम: मेदांता में वांगचुक से मिलने पहुंचे 15 सांसदों को पुलिस ने गेट पर ही रोका तो धरने पर बैठे

    गुरुग्राम: मेदांता में वांगचुक से मिलने पहुंचे 15 सांसदों को पुलिस ने गेट पर ही रोका तो धरने पर बैठे

    गुरुग्राम। देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों के समर्थन में पिछले 25 दिनों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मिलने बुधवार शाम को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के साथ 15 विपक्षी सांसद वांगचुक से मिलने मेदांता पहुंचे। पुलिस ने उन्हें अस्पताल गेट पर ही रोक लिया।

    सांसद संजय सिंह की पुलिस से इसको लेकर तीखी बहस हुई। अंदर प्रवेश न मिलने पर सभी सांसद अस्पताल के गेट पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान वांगचुक की पत्नी गीतांजलि भी वहां पहुंचीं।

    गीतांजलि ने कहा कि सोनम ने सरकार को चिट्ठी लिखी है, जिसमें अपनी शर्तें और मांगें बताई हैं। सरकार को ये मांगें मान लेनी चाहिए।

    करीब एक घंटे तक हंगामा चलने के बाद वांगचुक की निगरानी कर रही मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। टीम ने हेल्थ अपडेट दिया और मेडिकल कारणों का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ ब्लड रिलेशन वाले ही मरीज से मिल सकते हैं।

    इसके बाद सांसद वहां से चले गए। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार वांगचुक को अनशन तोड़ने नहीं देना चाहती, उन्हें मारना चाहती है।

    वांगचुक ने सरकार के सामने रखीं ये शर्तें
    वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने सरकार की पहल का आभार जताया और कहा कि उनकी तीन मुख्य मांगें हैं।

    पहली यह कि पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा हो। तीसरी मांग है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार किया जाए।

    वांगचुक ने अनशन तोड़ने की शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई 2026 को हुआ ‘चलो संसद’ मार्च पुलिस की कार्रवाई के बावजूद शांतिपूर्ण रहा।

    प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी केस या उत्पीड़न जैसी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, इस आश्वासन के बाद वे अनशन खत्म कर देंगे।

    मेदांता ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन
    मेदांता अस्पताल प्रबंधन ने बुधवार शाम हेल्थ बुलेटिन जारी किया। इसमें बताया गया कि वांगचुक को आईसीयू में रखा गया है।

    उनका इलाज मल्टी-डिसिप्लिनरी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही है। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है और वे पूरी तरह होश में हैं। उनका हर इलाज उनकी सहमति से किया जा रहा है।

     

  • सोनम वांगचुक से मिलने मेदांता अस्पताल पहुंचे विपक्षी सांसद, अनशन खत्म की अपील की

    सोनम वांगचुक से मिलने मेदांता अस्पताल पहुंचे विपक्षी सांसद, अनशन खत्म की अपील की

    सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 25 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं। शुरुआत में वह जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे लेकिन बाद में पुलिस उन्हें वहां से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह अब भी अपना अनशन जारी रखे हुए हैं। इसी बीच उनका अनशन खत्म कराने की कोशिश में विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल मेदांता अस्पताल पहुंचा और उनसे मुलाकात की।

    22 जुलाई को ही सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा जी और डॉ. जितेंद्र सिंह को एक चिट्ठी लिखी थी। उस चिट्ठी में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मुझे सरकार से एक स्पष्ट भरोसा चाहिए कि इस आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, न उन्हें सजा दी जाएगी और न ही बदले की भावना से कोई कदम उठाया जाएगा। अगर सरकार मुझे यह भरोसा देती है, तो मैं पूरे विश्वास के साथ अपना अनशन खत्म कर दूंगा।

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    मेदांता अस्पताल पहुंचे विपक्षी सांसद

    न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें 14 विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल नजर आ रहा है। यह वीडियो समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद राजीव राय के दफ्तर का है। वीडियो में राजीव राय के साथ SP के कई युवा सांसद भी दिखाई दे रहे हैं, जिनमें इकरा हसन और प्रिया सरोज शामिल हैं। वहीं, SP के अलावा आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी नजर आ रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में SP और AAP के अलावा RJD,CPI, JMM के सांसद भी शामिल हैं।

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    65 सांसदों ने सोनम वांगचुक को चिट्ठी लिखी

    सोनम वांगचुक ने जो चिट्ठी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा जी और डॉ. जितेंद्र सिंह को लिखी थी उसमें उन्होंने बताया कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने मुझे पत्र लिखा। कुछ मुझसे मिलने भी आए और कुछ आज शाम आने वाले हैं। सभी ने मुझसे अनशन खत्म करने की अपील की। उनका कहना है कि देश की सेवा के लिए मुझे अभी बहुत काम करना है। मैं भी उनसे सहमत हूं। मैं जीना चाहता हूं। मैं अपने छात्रों के बीच लौटना चाहता हूं। शिक्षा के क्षेत्र में फिर से काम करना चाहता हूं, जो हमेशा मेरे जीवन का मकसद रहा है।


  • ‘मैं भूख हड़ताल खत्म कर दूंगा लेकिन…’, सोनम वांगचुक ने केंद्र को लिखा पत्र

    ‘मैं भूख हड़ताल खत्म कर दूंगा लेकिन…’, सोनम वांगचुक ने केंद्र को लिखा पत्र

    सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाने का आश्वासन देती है तो वह अपनी भूख हड़ताल को खत्म करने पर विचार करेंगे। सोनम वांगचुक का यह पत्र मंगलवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बात आया।

    सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में लिख, ‘कल रात अस्पताल में मुझसे मिलने और मेरा अनशन खत्म करने की आपकी ईमानदार अपील के लिए धन्यवाद। हमारी बातचीत के दौरान आपने मुझे भरोसा दिलाया कि सरकार उन छात्रों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी, जिन्होंने पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या की थी।

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    मंत्री के इस्तीफे पर विचार करने का आश्वासन मिला: सोनम

    उन्होंने अपने पत्र में सरकार से मिले आश्वासन का भी जिक्र किया और कहा, ‘यह भी भरोसा दिलाया गया कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा होगी, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार करना भी शामिल है। मैं सरकार से सम्मानपूर्वक यह स्पष्ट आश्वासन चाहता हूं कि इस आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।’

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    ‘आश्वासन नहीं मिला तो अनशन रहेगा जारी’

    सोनम ने आगे कहा, ‘उनका एकमात्र अपराध एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज उठाना है। अगर ऐसा आश्वासन दिया जाता है तो मैं इस विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर दूंगा कि सरकार ने न केवल मेरी अपील सुनी है, बल्कि लाखों युवा भारतीयों की आकांक्षाओं को भी सुना। ऐसे आश्वासन के अभाव में मैं अनिश्चित काल तक अपना अनशन जारी रखने पर मजबूर हो जाऊंगा। मुझे यह भी उम्मीद है कि आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का अत्यधिक इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।’


  • ‘अनशन खत्म करें, लड़ाई जारी रहेगी’, अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक को लिखी चिट्ठी

    ‘अनशन खत्म करें, लड़ाई जारी रहेगी’, अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक को लिखी चिट्ठी

    सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन आज 25वें दिन भी जारी है। फिलहाल उनकी तबीयत को देखते हुए उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील की है। इसके लिए CJP ने एक खुला पत्र लिखा है, जिसे पार्टी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शेयर किया है।

    अपडेट जारी है…

  • सफदरजंग अस्पताल से सोनम वांगचुक डिस्चार्ज, इलाज के लिए मेदांता शिफ्ट

    सफदरजंग अस्पताल से सोनम वांगचुक डिस्चार्ज, इलाज के लिए मेदांता शिफ्ट

    सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज करवाके आगे के इलाज के लिए मेदांता अस्पताल (गुरुग्राम) ले जाया गया है। सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने जानकारी देते हुए बताया कि शाम 6:40 बजे वांगचुक को अपने यहां से छुट्टी दे दी।

    सफदरजंग अस्पताल की सीनियर डॉक्टरों की टीम ने सोनम वांगचुक की सभी मेडिकल रिपोर्ट और इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज मेदांता अस्पताल को सौंप दिए हैं।

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    सोनम के जरूरी स्वास्थ्य इंडिकेटर स्थिर

    सफदरजंग अस्पताल ने जानकारी देते हुए बताया कि डिस्चार्ज के समय सोनम के जरूरी स्वास्थ्य इंडिकेटर स्थिर थे। हालांकि, उनकी पैनसाइटोपेनिया (खून की तीनों प्रमुख कोशिकाओं में कमी) की समस्या है। बगाया गया है कि इसके अलावा सोनम के शरीर में पोटेशियम का स्तर 3.4 mEq/L है।

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    पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर सोनम

    सफदरजंग अस्पताल ने कहा कि आगे के इलाज में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सभी जांच रिपोर्ट और मेडिकल रिकॉर्ड मेदांता की टीम को दे दिए गए हैं। बता दें कि सोनम पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।


  • सफदरजंग से मेदांता में भर्ती होंगे सोनम वांगचुक, दिल्ली हाई कोर्ट ने दी इजाजत

    सफदरजंग से मेदांता में भर्ती होंगे सोनम वांगचुक, दिल्ली हाई कोर्ट ने दी इजाजत

    दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। अदालत ने डॉक्टरों की एक टीम की राय सुनी है कि सोनम वांगचुक को लागातर मेडिकल मॉनिटरिंग की जरूरत है। वह लंबे समय से अनशन पर हैं।

    चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेच ने सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो की अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला लिया। अदालत ने एम्स, सफदरजंग अस्पताल और सोनम वांगचुक के निजी चिकित्सकों से चर्चा के बाद यह फैसला लिया है।

    सोनम वांगचुक की हेल्थ रिपोर्ट क्या कह रही है?

    सोनम वांगजुट का यूरिक एसिड बढ़ा है, व्हाइट ब्लड सेल्स और हीमोग्लोबिन कम होने समेत कई रिपोर्ट ऐसे हैं, जो चिंताजनक हैं। डॉक्टरों ने कहा है कि संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हुई है, इसलिए निरंतर निगरानी जरूरी है।

    मेदांता में शिफ्ट करने पर कोर्ट ने क्या कहा?

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से कहा कि मेदांता अस्पताल प्रतिष्ठित है और सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते वांगचुक मेडिकल सलाह के बिना डिस्चार्ज न हों।

    हाई कोर्ट ने कहा, ‘सफदरजंग अस्पताल के सभी मेडिकल रिकॉर्ड और रिपोर्ट मेदांता अस्पताल को सौंपी जाएंगी। दोपहर बाद इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किए जाएंगे।’

    कब से भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक?

    सोनम वांगचुक जंतर मंतर पर 21 दिनों से धरना दे रहे थे। 18 जुलाई को जंतर मंतर से दिल्ली पुलिस ने उन्हें उठा लिया और सफदरजंग में भर्ती करा दिया। वह NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ धरने पर बैठे थे। 16 जुलाई को हाई कोर्ट ने ही उनकी सेहत पर नजर रखने के लिए निर्दशित किया था।

  • सोनम वांगचुक मामला: ‘अस्पताल कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का विस्तार बनता दिख रहा’

    सोनम वांगचुक मामला: ‘अस्पताल कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का विस्तार बनता दिख रहा’

    नई दिल्ली: सफदरजंग अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। डॉक्टरों ने कहा है कि यदि अस्पताल का माहौल ऐसा प्रतीत हो कि वह “उपचार के स्थान के बजाय कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का विस्तार बनकर काम कर रहा है”, तो इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

    डॉक्टरों ने अपने पत्र में वांगचुक के संवैधानिक अधिकारों, मरीज की स्वायत्तता, चिकित्सा नैतिकता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इसी तरह की चिंताएं एम्स (AIIMS) रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में व्यक्त की हैं।

    मरीज के साथ गरिमा और संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप व्यवहार होना चाहिए’

    रेजिडेंट डॉक्टरों ने लिखा कि वांगचुक की चिकित्सकीय स्थिति और अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता का निर्णय पूरी तरह चिकित्सकीय आधार पर होना चाहिए। लेकिन अस्पताल में भर्ती हर व्यक्ति के साथ सबसे पहले एक मरीज के रूप में गरिमा, संवेदनशीलता और चिकित्सा नैतिकता के अनुरूप व्यवहार किया जाना चाहिए।

    पत्र में कहा गया है कि किसी भी मरीज की स्वतंत्रता पर कोई भी प्रतिबंध केवल कानून के अनुसार, पारदर्शी और आनुपातिक होना चाहिए। ऐसा कोई कदम मरीज के अधिकारों, इलाज कर रहे डॉक्टरों की पेशेवर स्वतंत्रता या अस्पताल के सामान्य कामकाज को प्रभावित नहीं करना चाहिए।

    ‘अस्पताल में असाधारण सुरक्षा व्यवस्था चिंता का विषय’

    डॉक्टरों ने अस्पताल में की गई सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। पत्र के अनुसार, अस्पताल के कई हिस्सों को बंद करना, विभिन्न मंजिलों पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती, मरीजों और लोगों की आवाजाही पर रोक तथा अस्पताल की सामान्य सेवाओं में व्यवधान जैसी घटनाओं ने व्यापक चिंता पैदा की है।

    डॉक्टरों ने लिखा कि यदि इन व्यवस्थाओं के कारण मरीजों के इलाज में बाधा आई हो या अस्पताल ऐसा प्रतीत हो कि वह उपचार केंद्र के बजाय कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का विस्तार बन गया है, तो इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

    जंतर-मंतर में पुलिस कार्रवाई पर भी जताई चिंता

    सफदरजंग RDA ने सोमवार को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग पर भी चिंता व्यक्त की। डॉक्टरों ने कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की खबरें सही हैं, तो इससे संवैधानिक संस्थाओं में जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है और नागरिकों, विशेषकर चिकित्सा समुदाय के बीच भय का माहौल पैदा हो सकता है।

    वहीं, एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी अपने पत्र में कहा कि सार्वजनिक रूप से सामने आए वीडियो में सुरक्षा कर्मियों को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के एक वरिष्ठ प्रोफेसर और छात्रों के साथ कथित तौर पर धमकीपूर्ण व्यवहार करते देखा गया है। इन घटनाओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

    LAMA की अनुमति न मिलने पर उठाए सवाल

    डॉक्टरों ने राष्ट्रपति के समक्ष आठ प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सबसे अहम मांग यह है कि यदि यह सही है कि सोनम वांगचुक को चिकित्सकीय सलाह के विरुद्ध अस्पताल छोड़ने (Leave Against Medical Advice – LAMA) की अनुमति नहीं दी गई, तो यह सूचित सहमति, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है।

    पत्र में कहा गया है कि अस्पताल उपचार के लिए होते हैं, हिरासत के लिए नहीं। किसी सक्षम मरीज को कानून द्वारा प्राप्त सभी अधिकार मिलने चाहिए और उसकी स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध केवल विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत ही लगाया जाना चाहिए।

    ‘अस्पतालों का उपयोग केवल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए हो’

    रेजिडेंट डॉक्टरों ने राष्ट्रपति से यह सुनिश्चित करने की भी मांग की कि सरकारी अस्पताल केवल स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थान बने रहें और उन्हें किसी भी गैर-चिकित्सीय उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने की धारणा न बने।

    उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को भूख हड़ताल के दौरान सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद से वह कई पत्र लिखकर अस्पताल से रिहा किए जाने की मांग कर चुके हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने भी दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की है।

  • सोनम वांगचुक के समर्थन में ‘आप’ के साथ वकील सड़क पर उतरे

    सोनम वांगचुक के समर्थन में ‘आप’ के साथ वकील सड़क पर उतरे

    • पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया

    लखनऊ। सोमवार सोनम वांगचुक के समर्थन में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 3:30 बजे प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोककर हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कई कार्यकर्ताओं को घसीटते हुए बसों में बैठाकर इको गार्डन भेजा गया।

    इस दौरान आम आदमी पार्टी के समर्थन में कई वकील भी सड़क पर उतर आए। वकीलों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे थे। उनका कहना था, किस कानून के तहत इन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। वकीलों ने कहा लोग अपने ही परिसर में शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं, तो पुलिस कार्रवाई का आधार क्या है। 

    बता दें कि प्रदेशव्यापी प्रदर्शन की घोषणा करते हुए संजय सिंह ने वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने कहा था कि आम आदमी पार्टी पूरे उत्तर प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन कर सोनम वांगचुक के आंदोलन और युवाओं से जुड़े मुद्दों को जनता तक पहुंचाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं की समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रही है।

  • ‘तब तक जारी रहेगा, जब तक कि….’, सोनम वांगचुक ने खत्म नहीं की है भूख हड़ताल

    ‘तब तक जारी रहेगा, जब तक कि….’, सोनम वांगचुक ने खत्म नहीं की है भूख हड़ताल

    दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 20 जुलाई को संसद को घेरने के लिए मार्च निकाला। इस दौरान ऐसी चर्चा थी कि सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। वांगचुक ने अब इस खबर पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर कन्फर्म किया कि वह अभी भी भूख हड़ताल पर हैं। अपने बयान में उन्होंने कहा, ‘मेरा अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक युवा प्रतिनिधियों को पार्लियामेंट में सांसदों से मिलने की इजाजत नहीं मिल जाती।’

    अपडेट जारी है…

  • महराजगंज में AAP ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा:सोनम वांगचुक मामले और युवा मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग

    महराजगंज में AAP ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा:सोनम वांगचुक मामले और युवा मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग


    महराजगंज में आम आदमी पार्टी (आप) की इकाई ने सोमवार को जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में शिक्षाविद सोनम वांगचुक के साथ कथित पुलिस कार्रवाई की निंदा की गई और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई। पार्टी ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि देश में लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसके अतिरिक्त, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने और सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने का भी आरोप लगाया गया। पार्टी ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रपति से मांग की है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाए। साथ ही, पेपर लीक रोकने के लिए एक सख्त कानून बनाया जाए और युवाओं के लिए रोजगार के ठोस अवसर सुनिश्चित किए जाएं। पार्टी ने जंतर-मंतर जैसे स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की भी अपील की। यह ज्ञापन जिलाध्यक्ष नियामत अली और जिला महासचिव जाहिद अली के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा सौंपा गया। इस दौरान पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और युवाओं के हित में शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की।

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  • संसद मार्च से पहले सुरक्षा बढ़ी, सोनम वांगचुक की अनशन समाप्त करने के लिए तीन शर्तें

    संसद मार्च से पहले सुरक्षा बढ़ी, सोनम वांगचुक की अनशन समाप्त करने के लिए तीन शर्तें

    नई दिल्ली। मानसून सत्र के पहले दिन आज प्रस्तावित संसद मार्च को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने अनशन की समाप्ति के लिए तीन शर्ते रखी हैं।

    सोशल मीडिया पोस्ट में वांगचुक ने कहा कि वे 20 जुलाई को अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब उनकी तीन में से कोई एक शर्त पूरी होगी। उधर, उनकी पत्नी ने उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ का रुख किया है।

    सोनम का कहना है कि वे अनशन तभी समाप्त करेंगे, यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं और प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे।

    या फिर सीजेपी का नेतृत्व संसद के प्रवेश द्वार तक पहुंच जाए तथा विभिन्न दलों के सांसद उन्हें आश्वस्त करें कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।

    या फिर यदि स्वास्थ्य या अन्य कारणों से वह ऐसा करने में सक्षम नहीं होते, तो विभिन्न दलों के सांसद अस्पताल पहुंचकर उन्हें यही आश्वासन दें।

    उधर, दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक आम यात्रियों के लिए बंद रखने की घोषणा की है।

    संसद मार्च के मद्देनजर संसद परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और वज्र वाहन तैनात किए गए हैं, जबकि संसद मार्ग थाना क्षेत्र के आसपास बैरिकेड लगाए गए हैं।

     

  • कब और किन शर्तों पर अनशन खत्म करेंगे सोनम वांगचुक? खुद लिखी चिट्ठी

    कब और किन शर्तों पर अनशन खत्म करेंगे सोनम वांगचुक? खुद लिखी चिट्ठी

    एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक 23वें दिन भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने सफदरजंग अस्पताल से एक चिट्ठी लिखकर बताया है कि वह कब और किन शर्तों पर अपना अनशन खत्म कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह 20 जुलाई को अपना अनशन तोड़ देंगे लेकिन सरकार और सांसदों को उनकी कुछ मांगों को मानना होगा।

    सोनम वांगचुक ने अस्पताल में खुद को अवैध हिरासत में बताया है। उन्होंने लिखा कि उन्हें आने-जाने से रोका गया है, बोलने और संपर्क करने की आजादी पर पाबंदी लगा दी गई है। 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च की तैयारी चल रही है।

    हजारों समर्थक जंतर मंतर पर जुटे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके रातभर प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाते रहे। लोग साथी प्रदर्शनकारियों को गमछे और दुपट्टे से हवा करते भी नजर आए।

    यह भी पढ़ें: LIVE: सोनम वांगचुक और CJP का ‘चलो संसद मार्च’, दिल्ली पुलिस अलर्ट, कामयाब होगा?

    सोनम वांगचुक की शर्तें क्या हैं?

    सोनम वांगचुक ने अपनी चिट्ठी में तीन शर्तें बताई हैं-

    • पहली शर्त: सरकार हाल ही में शिक्षा व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों जैसे पेपर लीक के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करे।
    • दूसरी शर्त: सांसद और राजनीतिक पार्टियां संसद में इस मुद्दे को उठाने का आश्वासन दें।
    • तीसरी शर्त: अलग-अलग दलों के नेता अस्पताल आकर उन्हें यह आश्वासन दें।

    गीतांजलि, सोनम वांगचुक की पत्नी:-
    अस्पताल में सोनम वांगचुक के डॉक्टरों को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। कोई भी अस्पताल मरीज पर जबरन अपना इलाज नहीं थोप सकता।

    सोनम वांगचुक की पत्नी ने क्या कहा है?

    सोनम वांगचुक पत्नी गीतांजलि ने कहा कि अगर सांसद शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा उठाने का भरोसा दें तो उनके पति अनशन समाप्त कर देंगे। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वे NEET पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्याओं जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब चाहते हैं।

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    क्या यह प्रदर्शन हो पाएगा?

    दिल्ली पुलिस ने मार्च को अनुमति नहीं दी है। पुलिस ने कहा कि संसद की ओर कोई मार्च की अनुमति नहीं ली गई है और न ही दी गई है। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी अनधिकृत प्रदर्शन में शामिल न हों।

    क्यों सोनम वांगचुक को छोड़ नहीं रही दिल्ली पुलिस?

    दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने उन्हें डॉक्टरों के साथ सहयोग करने को कहा और स्वास्थ्य रिपोर्ट तीन दिनों में मांगी है। अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।


  • सोनम वांगचुक अस्पताल में, धरने पर अभिजीत दीपके, कामयाब होगा चलो संसद मार्च?

    सोनम वांगचुक अस्पताल में, धरने पर अभिजीत दीपके, कामयाब होगा चलो संसद मार्च?

    कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं। सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन पर अनशन खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा है। अभिजीत दीपके की अगुवाई में अब कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक, संसद घेरने की तैयारी में हैं। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने इस विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है। देर रात, समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन भी जंतर मंतर पर प्रदर्शन स्थल पर नजर आईं हैं।

    नई दिल्ली में प्रदर्शन की इजाजत पुलिस ने नहीं दी है। अब सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। संसद के मानसून सत्र और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने न्यू दिल्ली जिले में पाबंदियां लगा दी हैं। दिल्ली पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।

    पुलिस ने साफ कहा है कि CJP ने मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी और न ही दी गई है। इसलिए 20 जुलाई को मार्च की इजाजत नहीं होगी।CJP इस मार्च के जरिए NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों का विरोध कर रही है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।

    पुलिस ने न्यू दिल्ली जिले के संसद स्ट्रीट सब-डिवीजन में पाबंदियां लगा दी हैं। इनमें पांच या उससे ज्यादा लोगों का इकट्ठा होना, सार्वजनिक बैठकें, जुलूस, नारे लगाना, भाषण देना, बैनर-पोस्टर, लाठी-डंडे और हथियार ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। बिना लिखित अनुमति के कोई भी प्रदर्शन या धरना नहीं हो सकेगा।

    जंतर मंतर को छूट दी गई है, लेकिन वहां भी शाम 5 बजे के बाद अनुमति लेकर ही कार्यक्रम किए जा सकते हैं। उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कार्रवाई होगी।पुलिस ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त तैयारियां की गई हैं और पूरे संसद सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहेगी।

  • LIVE: सोनम वांगचुक और CJP का ‘चलो संसद मार्च’, दिल्ली पुलिस अलर्ट, कामयाब होगा?

    LIVE: सोनम वांगचुक और CJP का ‘चलो संसद मार्च’, दिल्ली पुलिस अलर्ट, कामयाब होगा?

    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलनकारी जंतर मंतर पर सोमवार 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं। जंतर मंतर पर लोगों की भारी भीड़ जुट रही है। पुलिस ने हैवी बैरिकेडिंग की है। आंदोलनकारियों ने रातभर जगकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने समर्थकों से अपील की है कि सुबह 9 बजे जंतर मंतर पर पहुंचें। उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से मार्च में शामिल होने की बात कही। सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर हैं लेकिन सफदरजंग अस्पताल में उन्हें रखा गया है।

    अभिजीत दीपके का दावा है कि यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर है, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा। दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि मार्च को कोई अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने धारा 163 बीएनएसएस के तहत रोक लगाई हुई है। जंतर मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रैपिड एक्शन फोर्स की गाड़ियां तैनात हैं। क्या यह प्रदर्शन कामयाब होगा, पढ़ें पल-पल की खबर, खबरगांव पर।

    पढ़ें लाइव अपडेट-

  • ‘अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक आंदोलनकारी नहीं, शिक्षक हैं’, पत्नी का भावुक संदेश

    ‘अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक आंदोलनकारी नहीं, शिक्षक हैं’, पत्नी का भावुक संदेश

    लद्दाख के शिक्षा सुधाकर और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगजुक का अनशन अब 22वें दिन में पहुंच गया है। इस बीच उनकी पत्नी ने एक भावुक लेख लिखकर उनके संघर्ष को एक अलग नजरिए से पेश किया है। उन्होंने कहा कि वह सोनम वांगचुक को किसी आंदोलनकारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे शिक्षक के रूप में देखती हैं जिसे देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के लिए अपनी असली जिसम्मेदारी छोड़कर सड़क पर उतना पड़ा।

    उन्होंने कहा कि पिछले 30 वर्षों से दोनों का एक ही सपना रहा है शिक्षा के जरिए देश को बेहतर बनाना। सोमन वांगचुक ने SECMOL और HIAL जैसे संस्थानों के जरिए पढ़ाई को समाज और लोगों की जिंदगी से जोड़ने की कोशिश की। वहीं, उनकी पत्नी का मानना है कि शक्षा सिर्फ डिग्री या नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि इंसान के व्यक्तित्व को निखारने और उनकी छिपी हुई प्रतिभा को पहचानने का माध्यम होनी चाहिए।

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    गीतांजलि ने शिक्षा के उद्देश्य का किया जिक्र

    अपने लेख में सोनम वांगचुक की वाइफ गीतांजलि जे आंग्मो ने बताया कि साल 1989 में श्री अरविंद आश्रम की यात्रा ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया। वहीं उन्हें यह समझ मिली कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना या परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास को भी आगे बढ़ाना है। उनका मानना है कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था युवाओं को रोजगार तो देती है लेकिन उन्हें जीवन का उद्देश्य खोजने में पर्याप्त मदद नहीं कर पाती।

    उन्होंने कहा कि HIAL जैसे संस्थानों की स्थापना इसी सोच के साथ की गई जहां स्थानीय समस्याओं के समाधान, व्यावहारिक, शिक्षा, नवाचार, सहानुभूति और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाता है। उनके मुताबिक, AI के दौर में भी इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसकी संवेदनशीलता, रचनात्मक सोच और चरित्र ही रहेंगे। इसलिए शिक्षा प्रणाली में ऐसे सुधार जरूरी हैं जो बच्चों को केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी तैयार करें।

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    गीतांजलि ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

    सोनम वांगजुक की पत्नी ने लिखा कि उनके पति का अनशन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्ता में बदलाव की मांग की प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनशन के दौरान सोमन वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया जहां भारी पुलिस मौजूदगी के कारण माहौल इलाज से अधिक हिरासत जैसा महसूस हो रहा है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि शिक्षा का मुद्दा संसद और सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होगा। उनका कहना है कि सोनम वांगचुक के संघर्ष का सबसे बड़ा सम्मान यही होगा कि देश ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करे, जहां हर बच्चे को अपनी पूरी क्षमता पहचानने और समाज के लिए सार्थक योगदान देने का अवसर मिल सके।