श्रावस्ती जिले के जमुनहा क्षेत्र में राप्ती नदी के किनारे बसे कई गांव पिछले एक दशक से बाढ़ और नदी के कटान की गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं। घाटेपुरवा, बीरपुर, लौकिहा और शिकारी चौड़ा जैसे गांवों के निवासी हर साल विस्थापन और तबाही झेलते हैं, जिससे उन्हें झोपड़ियों में जीवन गुजारना पड़ रहा है। प्रत्येक वर्ष नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे इन गांवों में भीषण बाढ़ आती है। बाढ़ के कारण ग्रामीणों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है। हसनापुर निवासी रामप्रसाद ने बताया कि लगभग 10 वर्ष पहले आई बाढ़ में उनका घर नदी में बह गया था। तब से वे सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। उन्हें अब तक न तो कोई सरकारी आवास मिला है और न ही कोई मुआवजा दिया गया है। घाटेपुरवा के श्यालाल भगत के अनुसार, राप्ती नदी के कटान में उनकी खेती की जमीन बह गई है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। बीरपुर निवासी सावितरमा ने सुझाव दिया कि राप्ती नदी पर तटबंध का निर्माण कर बीरपुर, घाटेपुरवा, शिकारी चौड़ा और आसपास के कई अन्य गांवों को बाढ़ और कटान से बचाया जा सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तटबंध के शीघ्र निर्माण, बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। उनका मानना है कि इससे वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।
श्रावस्ती के गांव बाढ़-नदी कटान से प्रभावित:एक दशक से विस्थापन झेल रहे ग्रामीण, तटबंध की मांग
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