नई दिल्ली: दिनभर की भागदौड़ के बाद सूर्यास्त देखना सिर्फ आंखों को सुकून ही नहीं देता, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित रूप से सूर्योदय और सूर्यास्त देखने से तनाव कम हो सकता है, नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है और मन अधिक शांत महसूस करता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्यास्त देखने के दौरान इंसान को ‘ऑ (Awe)’ यानी किसी अद्भुत दृश्य को देखकर आश्चर्य और गहरे भाव का अनुभव होता है। यह भावना लोगों को नकारात्मक सोच से बाहर निकालने, वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने और मानसिक तनाव कम करने में मदद कर सकती है। कुछ शोधों में यह भी पाया गया कि ऐसे अनुभव लोगों में दूसरों की मदद करने और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, सूर्यास्त और सूर्योदय शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शाम की प्राकृतिक रोशनी शरीर को आराम करने का संकेत देती है, जिससे मेलाटोनिन हार्मोन बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह हार्मोन अच्छी और गहरी नींद के लिए जरूरी माना जाता है। इसके विपरीत, रात में मोबाइल और अन्य स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया कि प्रकृति के बीच समय बिताने और सूर्यास्त देखने वाले लोगों की याददाश्त, ध्यान लगाने की क्षमता और मनोदश में सकारात्मक बदलाव देखे गए। शोधकर्ताओं का कहना है कि नियमित रूप से ऐसे प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने से शरीर में तनाव से जुड़े संकेतकों का स्तर भी कम हो सकता है, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रोजाना कुछ मिनट भी सूर्यास्त या सूर्योदय देखने का अवसर मिले तो यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकता है। हालांकि, वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का एक सकारात्मक हिस्सा हो सकता है।












