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बस्ती जिले के कप्तानगंज ब्लॉक स्थित पोखरा बाजार के संगरिया घाट पर मनोरमा नदी का जल पूरी तरह निर्मल दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों के सहयोग से इस घाट को स्नान के योग्य बनाया गया है। हालांकि, नदी का अधिकांश हिस्सा अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।संगरिया घाट से लगभग एक किलोमीटर दूर पोखरा घाट पर करीब 50 गांवों के लोग दाह संस्कार के लिए आते हैं। वहां का पानी स्नान के योग्य न होने के कारण लोगों को संगरिया घाट पर आकर नहाना पड़ता है। यह स्थिति दर्शाती है कि यदि स्थानीय प्रयासों से एक घाट को स्वच्छ किया जा सकता है, तो पूरी नदी को भी निर्मल बनाया जा सकता है। कभी क्षेत्र की जीवनदायिनी कही जाने वाली मनोरमा नदी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है और उसे संरक्षण की आवश्यकता है। दाह संस्कार के लिए आए उमेश ने बताया कि यदि संगरिया घाट साफ हो सकता है, तो प्रशासन के सहयोग से पूरी नदी को भी निर्मल बनाया जा सकता है। नदी के दोनों किनारों पर घनी आबादी बसी हुई है, जो कभी मनोरमा के जल का उपयोग पीने और खेती जैसे कार्यों के लिए करती थी। स्थानीय निवासी राजेश निषाद और निरहू निषाद ने बताया कि उनके बचपन में मनोरमा नदी इतनी स्वच्छ थी कि वे सीधे इसका पानी पीते थे। अब कुछ स्थानों को छोड़कर नदी खुद ही अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मनोरमा नदी के संरक्षण और स्वच्छता के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे आने वाली पीढ़ियां भी इस जीवनदायिनी नदी के महत्व को समझ सकेंगी।
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संगरिया घाट पर मनोरमा नदी का जल निर्मल:स्थानीय सहयोग से हुई साफ, अन्य जगहों पर अस्तित्व का संकट
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