प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार संसद के मॉनसून सत्र में कई उम्मीदें लेकर जा रही है। उम्मीद है कि तब तक नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की दूसरी कैबिनेट में फेरबदल का काम पूरा हो जाएगा। संसद का मॉनसून सत्र, 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। अब विपक्षी दलों से हुई बगावत के बाद, एनडीए के खेमे में आए सांसदों की मदद से NDA की ताकत बढ़ गई है।
सरकार ने इस सत्र के लिए कई अहम लक्ष्य तय किए हैं। सरकार आरक्षण, परिसीमन से लेकर एक देश एक चुनाव तक के प्रोजेक्ट को ध्यान में रखकर चल रही है। संसद में पेपर लीक और अयोध्या राम मंदिर दान चोरी कांड को लेकर हंगामा भी होने के आसार हैं। सरकार की तैयारी क्या है, किन संविधान संशोधनों को लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है, आइए जानते हैं।
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किन संविधान संशोधनों पर जो रही है सरकार?
सरकार दो बड़े संविधान संशोधन बिल लाने की तैयारी कर रही है। पहला है 130वां संशोधन विधेयक। इसमें प्रस्ताव है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री 5 साल या उससे ज्यादा सजा वाले केस में 30 दिन से ज्यादा जेल में रहे, तो वह अपने पद से अपने आप हट जाएंगे।
सरकार का कहना है कि जेल में बैठे नेता सरकार नहीं चला सकते। विपक्ष का आरोप है कि यह बिल केवल आरोप लगने पर भी नेता को सजा दे सकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण है 131वां संशोधन बिल। यह महिलाओं को विधानसभाओं और लोकसभा में 33 फीसदी आरक्षण लागू करने के लिए है।
लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने और 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से सीटों की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। अप्रैल सत्र में यह बिल पास नहीं हो सका था क्योंकि सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं था।
एक देश-एक चुनाव पर भी जोर
सरकार का प्रस्तावित 129वां संशोधन विधेयक, एक देश, एक चुनाव से जुड़ा है। यह अभी संसदीय समिति में है। सरकार चाहती है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ-साथ हों, जिससे विकास के काम रुकें नहीं। सरकार इस पर भी आगे बढ़ना चाहती है।
दो-तिहाई बहुमत के लिए जोर क्यों लगा रहा NDA?
साधारण बिल के लिए साधारण बहुमत काफी है, लेकिन संविधान बदलने के लिए लोकसभा में मौजूद और वोटिंग करने वाले दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिए। अभी लोकसभा की ताकत 540 है, तो पूरे वोट पड़ने पर करीब 360 वोट चाहिए। NDA के पास 300 के पार संख्या है, लेकिन अभी भी दो-तिहाई बहुमत के लिए और सहयोग की जरूरत है।
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विपक्ष की चिंता क्या है?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है किBJP संविधान बदलना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी विपक्षी दलों को तोड़कर बहुमत जुटा रही है। विपक्ष डरता है कि परिसीमन से उत्तर भारत के बड़े राज्यों, जैसे UP और बिहार को ज्यादा सीटें मिलेंगी और दक्षिण के राज्यों का प्रभाव कम हो सकता है।
विपक्ष का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी का असली मकसद अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाला आरक्षण कमजोर करना है।
सरकार का पक्ष क्या है?
सरकार का कहना है कि जिन बदलावों पर जोर दिया जा रहा है, वे बदलाव देश के हित में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि आरक्षण खत्म नहीं होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा है कि जेल में बैठकर नेता सरकार नहीं चला सकते। अभी मॉनसून सत्र में इन बिलों पर चर्चा और वोटिंग हो सकती है। विपक्ष इसे संविधान पर हमला बता रहा है, जबकि सरकार इन्हें सुधार और जवाबदेही करार दे रही है।












