अमेरिका और इजरायल के साथ जंग के बीच ईरान ने सबसे अधिक हमले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर किए। तब किसी को यह समझ नहीं आ रहा था कि यूएई के प्रति ईरान इतना बड़ा प्रतिशोध क्यों दिखा रहा है? लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की एक पोस्ट ने सब कुछ साफ कर दिया है। यूएई पर 550 बैलिस्टिक मिसाइल और 2200 से अधिक ड्रोन हमलों के पीछे इजरायल के साथ उसकी बढ़ती दोस्ती ही प्रमुख कारण है।
बुधवार की रात इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुपचुप तरीके से संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया। यहां उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की।’ यह पहली बार था जब इजरायल के प्रधानमंत्री ने यूएई की यात्रा करने की बात सार्वजनिक तौर पर स्वीकार की। सोशल मीडिया पोस्ट के बाद दुनियाभर में इस ऐतिहासिक घटना की चर्चा होने लगी।
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इजरायली पोस्ट के कुछ समय बाद यूएई ने भी अपना पक्ष रखा और इजरायल के दावे का खंडन किया। यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘संयुक्त अरब अमीरात इस बात की पुष्टि करता है कि इजरायल के साथ उसके संबंध सार्वजनिक हैं और आधिकारिक रूप से घोषित अब्राहम समझौते के तहत संचालित होते हैं, न कि अपारदर्शी या अनौपचारिक समझौतों पर आधारित हैं। तदनुसार बिना पूर्व सूचना के यात्राओं या गुप्त समझौतों से संबंधित कोई भी दावा पूरी तरह निराधार है जब तक कि संयुक्त अरब अमीरात के संबंधित अधिकारी इसकी घोषणा न करें।’
इजरायल और यूएई के बीच साल 2020 में अब्राहम समझौता हुआ। इसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य बने। मगर नेतन्याहू ने यूएई का दौरा नहीं किया था। टाइम्स ऑफ इजरायल ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि बेंजामिन नेतन्याहू और बिन जायद ने 26 मार्च को ओमान सीमा के नजदीक अल-ऐन शहर में मुलाकात की थी। दोनों की मुलाकात कई घंटों चली।
यूएई और इजरायल के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग
- समन्वित हमलों
- खुफिया जानकारी
- ड्रोन और मिसाइल को पता लगाना
- ईरानी टारगेट का सेलेक्शन करना
यूएई को क्या डर सता रहा?
अब सवाल उठ रहा है कि इजरायल के दावों के विपरीत यूएई नेतन्याहू की यात्रा का खंडन क्यों कर रहा है? दरअसल, मौजूदा समय में पड़ोसी सऊदी अरब के साथ भी यूएई के रिश्ते अच्छे नहीं है। अगर वह सार्वजनिक तौर पर बेंजामिन नेतन्याहू की यात्रा की बात स्वीकारता है तो उसे रियाद की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है, क्योंकि एक समय था जब सऊदी अरब भी इजरायल को मान्यता देने को उत्सुक था। मगर पिछले साल कतर की राजधानी दोहा पर इजरायली हमले के बाद उसने यह विचार त्याग दिया। बाद में सऊदी अरब ने पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के साथ मिलकर एक क्षेत्रीय रक्षा गठबंधन तैयार करने का प्रयास भी किया।
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ईरान खाड़ी क्षेत्र में यूएई को इजरायल का सबसे बड़ा सहयोगी मानता है। हालांकि अभी तक उसने यूएई पर अपने हमलों के पीछे वहां स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को वजह बताया। अगर यूएई नेतन्याहू की यात्रा को स्वीकार करता तो ईरान को उस पर हमला करने की एक और वजह मिल सकती है। यही कारण है कि यूएई ने रक्षात्मक तरीका अपनाना ज्यादा उचित समक्षा।
अलग-थलग पड़ने का डर: खाड़ी देशों में सिर्फ यूएई को छोड़कर किसी भी देश के इजरायल के साथ अच्छे रिश्ते नहीं है। गाजा युद्ध मामले में सऊदी अरब, कतर, कुवैत जैसे देश खुलकर इजरायल की आलोचना कर चुके हैं। सोमालीलैंड मामले में भी अधिकांश मुस्लिम देशों ने इजरायल की निंदा की। हालांकि यूएई ने अलग रुख अपनाया। उसने इजरायल की सार्वजनिक तौर पर कोई निंदा नहीं की। एक डर यह भी है कि अगर नेतन्याहू की यात्रा को यूएई स्वीकार करता है तो वह खाड़ी देशों में अलग-थलग पड़ सकता है।
ईरान के महान लोगों से दुश्मनी मोल लेना एक मूर्खतापूर्ण जुआ है। ऐसा करने में इजरायल के साथ मिलीभगत करना अक्षम्य है। इजरायल के साथ मिलकर फूट डालने की साजिश रचने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। अब्बास अराघची, ईरानी विदेश मंत्री।












