HomeHealth & Fitnessअमेरिका-चीन तीन साल के लिए रणनीतिक स्थिरता पर सहमत

अमेरिका-चीन तीन साल के लिए रणनीतिक स्थिरता पर सहमत

बीजिंग। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को चीन का दौरा पूरा कर राजधानी बीजिंग से स्वदेश रवाना हो गए। उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दो दिनों तक बातचीत की जिसमें ईरान और ताइवान से लेकर व्यापार, तेल एवं बोइंग जैसे तमाम मुद्दे शामिल रहे। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, शी ने कहा कि अमेरिका और चीन अगले तीन वर्ष के लिए “रणनीतिक स्थिरता” पर सहमत हुए हैं।

ट्रंप ने बीजिंग के इस दौरे में दिए गए एक साक्षात्कार में कहा कि चीन, अमेरिकी तेल और सोयाबीन खरीदने पर सहमत हो गया है। उन्होंने दावा किया कि चीन ने बोइंग कंपनी से 200 बड़े वाणिज्यिक जेट विमान खरीदने पर सहमति जताई है। माना जा रहा है कि यह सौदा लगभग एक दशक में अमेरिका निर्मित विमानों की सबसे बड़ी खरीद हो सकती है। इसे दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

सीएनएन, सीबीएस न्यूज, सीएनबीसी, फॉक्स न्यूज और चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, अपने दौरे के दौरान ट्रंप ने गुरुवार को रात्रिभोज में शी को 24 सितंबर को व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया है। चीन ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि शी इस न्योते को स्वीकार करेंगे या नहीं। दोनों नेता नवंबर में शेन्ज़ेन में होने वाली एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) बैठक और दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाली जी 20 बैठक के दौरान भी मिल सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक भी सितंबर की शुरुआत में न्यूयॉर्क में होनी तय है।

इस यात्रा के दौरान ट्रंप ने शी के साथ व्यापार सौदों की तारीफ की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने और जिनपिंग ने बीजिंग शिखर सम्मेलन के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सौदे किए और अमेरिका-ईरान संघर्ष को खत्म करने की इच्छा साझा की। दोनों नेताओं ने शुक्रवार सुबह चीन की सत्ता के केंद्र झोंगनानहाई गार्डन परिसर में द्विपक्षीय बैठक की। दोपहर बाद ट्रंप एयरफोर्स वन में सवार होकर वापस वाशिंगटन के लिए रवाना हो गए।

एक दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि चीन, अमेरिकी विमान और कृषि उत्पाद खरीदने पर सहमत हो गया है। इन समझौतों में अमेरिका-चीन व्यापार बोर्ड का गठन भी शामिल है। ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं के “ईरान मुद्दे पर काफी हद तक एक जैसे विचार हैं।” दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाना चाहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हमारे रिश्ते बहुत मजबूत हैं। हमने सचमुच शानदार काम किया है।”

दोनों राष्ट्रपतियों ने इससे पहले गुरुवार को एक बंद कमरे में बैठक की थी, जो लगभग दो घंटे 15 मिनट तक चली। इस बैठक में व्यापार, ईरान और ताइवान जैसे विषयों पर चर्चा हुई। ट्रंप ने इस बैठक को शानदार बताया था। ट्रंप ने यह भी कहा था कि शी ने वादा किया है कि वह ईरान को कोई भी सैन्य उपकरण नहीं देंगे। शी इस बात पर भी सहमत हुए कि तेहरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।

चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, गुरुवार की बैठक में शी ने ट्रंप को चेतावनी दी कि यदि ताइवान के मुद्दे को ठीक ढंग से नहीं संभाला गया तो इसके परिणामस्वरूप टकराव और यहां तक कि संघर्ष भी हो सकते हैं। यह एक कड़ी चेतावनी थी लेकिन अमेरिका ने बैठक के संबंध में जारी अपने आधिकारिक बयान में ताइवान का कोई जिक्र नहीं किया। ताइवान, चीन के हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन इस द्वीप पर दोबारा नियंत्रण स्थापित करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। जबकि अमेरिका ने ताइवान को अरबों डॉलर की सैन्य मदद दी है।

दोनों देशों के अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप और जिनपिंग के बीच दो दिनों की बातचीत में अब तक कुछ ही ठोस समझौते हुए हैं। अभी और भी समझौते हो सकते हैं। दोनों देशों को करीब से समझने वाले टीकाकारों का कहना है कि इन महाशक्तियों के बीच का उथल-पुथल भरा इतिहास बताता है कि अभी होने वाले समझौते बाद में टूट भी सकते हैं। अरबों डॉलर के समझौतों को पूरा होने में कई साल लग सकते हैं। इससे तनाव भड़कने के लिए काफी समय मिल जाता है, चाहे वह जानबूझकर हो या अनजाने में और समझौते टूट भी सकते हैं।

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