लखनऊ। ग्रामीण महिला एवं बाल कल्याण सोसाइटी द्वारा बाराबंकी के मंजीठा गांव में संचालित ‘जागो री जागो’ अनौपचारिक शिक्षण केन्द्र में शनिवार को बच्चों के लिए प्रेरक कहानी सत्र का आयोजन किया गया। लोक संस्कृति शोध संस्थान की मासिक श्रृंखला दादी-नानी की कहानी जीतेश की ज़ुबानी के अंतर्गत स्टोरीमैन जीतेश श्रीवास्तव ने बच्चों को नाई और सरपंच की प्रेरक कहानी सुनाई। इस अवसर पर बच्चों में कॉपी और पेंसिल भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ मनोरंजक खेलों तथा कठिन वाक्यों के उच्चारण अभ्यास से हुआ। कहानी सुनाने के दौरान जीतेश श्रीवास्तव ने कहा कि मुसीबत के समय डरने या घबराने के बजाय धैर्य और सूझबूझ से समस्या से बाहर निकलने का रास्ता तलाशना चाहिए। उन्होंने बच्चों से कहानी से जुड़े प्रश्न भी पूछे जिनका बच्चों ने उत्साहपूर्वक उत्तर दिया। इस अवसर पर अर्चना गुप्ता ने जिसने सूरज-चाँद बनाया कविता का सस्वर पाठ किया। बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ कविता को दोहराया।
“सूझबूझ ही सच्ची ताकत” कहानी से मिली सीख
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