संसद परिसर में गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी का अनोखा अंदाज देखने को मिला। वे अपने गले में एक बैनर डालकर पहुंचे। इस पर टीएमसी छोड़ने वाले 20 सांसदों की फोटो थी। जिस पर लिखा था ‘लोकसभा में बंगाल का 20 गद्दार’। इस बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी कल्याण बनर्जी के पास पहुंची और उनसे बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में हुई बातचीत सोशल मीडिया पर खूब वायरल है।
कल्याण बनर्जी से प्रियंका गांधी कहती हैं, ‘पहले यह लोग हमारे यहां (कांग्रेस) से आपके यहां (टीएमसी) गए। वहां से बीजेपी में चले गए।’ जवाब में कल्याण बनर्जी कहते हैं, ‘वो लोग तो हमारी टिकट पर जीते थे। आप के यहां से 2014 में चले गए थे। पश्चिम बंगाल में आप लोगों का कुछ भी नहीं था, इसलिए। वे लोग कभी आपकी टिकट पर संसद नहीं आए।’
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मैं भी कांग्रेसी था: कल्याण बनर्जी
प्रियंका गांधी के साथ मौजूद पूर्णिया से सासंद पप्पू यादव ने कहा कि पहले वे कांग्रेसी ही थे। जवाब में कल्याण बनर्जी कहते हैं, ‘कांग्रेसी तो मैं भी था। मैं यूथ कांग्रेस का उपाध्यक्ष था।’ बनर्जी आगे कहते हैं कि आप लोगों ने 1997 में दीदी को भगा दिया था। यह बात बोलो। अगर दीदी को नहीं भागते तो तुम लोगों का ऐसा हाल होता।
‘सीपीएम के साथ हो गई थी कांग्रेस’
प्रियंका गांधी ने आगे कहा, ‘दीदी को राजीव गांधी बहुत सम्मान करते थे’। कल्याण बनर्जी ने भी इस पर सहमति जताई और कहा कि राजीव गांधी बहुत प्यार करते थे और दीदी को सम्मान भी दिया। अगले ही पल कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि उस वक्त कांग्रेस और सीपीएम एक हो गए थे। हमारी लड़ाई सीपीएम से थी। सीपीएम के बारे में जब दीदी बोलती थी तो उस वक्त दीदी को निकाल दिया गया था।
बनर्जी बोले- पप्पू सिंह ज्यादा मत बोलो
पप्पू यादव ने बीच में बोलने की कोशिश की तो कल्याण बनर्जी ने कहा कि पप्पू सिंह सुनो। ज्यादा मत बोलो। प्रियंका गांधी ने पप्पू यादव से कहा कि पप्पू यादव को सिंह बना दिया। इस पर पप्पू यादव हंसने लगते हैं। बाद में पप्पू यादव ने कल्याण बनर्जी से पूछा कि क्या आज कांग्रेस के साथ है? जवाब में कल्याण बनर्जी ने हां कहा।
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बता दें कि टीएमसी छोड़ने वालीं महिला सांसदों के साथ असंसदीय भाषा के इस्तेमाल करने के आरोप में कल्याण बनर्जी को पूरे मानसून सत्र से निलंबित कर दिया गया। हालांकि वह संसद परिसर में अपने अंदाज में विरोध जताते रहते हैं। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से टीएमसी सबसे बड़ी संकट से जूझ रही है। पहले लगभह 58 विधायकों ने साथ छोड़ा और बाद में 20 लोकसभा सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया।












