दक्षिण अफ्रीका में विदेशी विरोधी आंदोलन तेज हो गया है। सबसे अधिक चिंताजनक हालात डरबन शहर में हैं। पिछले कई हफ्तों से विदेशी नागरिकों के खिलाफ चल रहा अभियान अब हिंसक हो चुका है। अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है। वहीं हजारों की संख्या में विदेशी नागरिकों को देश छोड़ना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने 30 जून तक अल्टीमेटम दिया था और इसके बाद हिंसा की बात कही थी।
उधर, दक्षिण अफ्रीका की सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कदम न उठाने का आरोप है। पीड़ितों का कहना है कि स्थानीय लोगों की नाराजगी से बचने की खातिर सरकार कोई एक्शन नहीं ले रही है। पुलिस भी मामला दर्ज करने से बचती है। 2022 की जनगणना के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका में कानूनी और अवैध तरीके से 24 लाख विदेशी नागरिक रहते हैं।
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हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी डरबन शहर में जुटे और विदेशी नागरिकों को 30 जून से पहले देश छोड़ने का अल्टीमेटम दिया। पुलिस बख्तरबंद गाड़ियों से पहरा दे रही है। हेलीकॉप्टर से भी निगाह रखी जा रही है। मगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा है। उनसे सिर्फ हिंसा से बचने की अपील की जा रही है।
विदेशी लोगों ने शुरू किया पलायन
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 30 जून के बाद हम अच्छे से बात नहीं करेंगे। हम एक्शन लेंगे। यही वजह है कि दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले विदेशियों को डेडलाइन खत्म होने के बाद हिंसा का डर सता रहा है। अभी से ही बड़ी संख्या में लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। बसों में लोगों की भीड़ है। दक्षिण अफ्रीका की उत्तरी सीमा पर लगातार विदेशी नागरिकों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है।
डरबन और जोहान्सबर्ग में हालात सबसे खराब
सबसे तनावपूर्ण माहौल डरबन में हैं। यहां सड़कों पर सन्नाटा है। विदेशी लोगों ने खुद को अपने घरों में कैद कर लिया है। सड़क पर सिर्फ प्रदर्शनकारी ही दिखाई पड़ रहे हैं। लगभग सभी दुकानें बंद हैं। तनावपूर्ण माहौल की वजह से कई मकान मालिकों ने विदेशी नागरिकों से घर भी खाली करवा लिया है, क्योंकि उन्हें हमले का डर सता रहा है। प्रदर्शनकारी ‘अबाहम्बे’ का नारा लगा रहे हैं। इसका अर्थ ‘उन्हें जाना होगा’ होता है। हर प्रदर्शनकारी के हाथ में लाठी-डंडा है। इससे साफ झलकता है कि किसी भी वक्त विदेशी विरोधी अभियान हिंसा में बदल सकता है।
पथराव, लूटपाट और आगजनी
डरबन और जोहान्सबर्ग में सेना को तैनात किया गया है। जोहान्सबर्ग के हिलब्रो में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की खबर है। पुलिस ने अभी तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। उधर, प्रदर्शनकारियों ने गोली चलाने वाले के वाहन पर आग लगा दी। इसमें एक युवक झुलस गया। येओविल शहर के कुछ घरों में पथराव की भी खबर है। सोवेटो कस्बे में एक विदेशी नागरिक की दुकान में लूटपाट की गई। अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। क्वाज़ुलु-नताल प्रांत में भी लूटपाट की सूचना है। यहां 10लोगों को दबोचा गया। वहीं एक विदेशी नागरिक की पिटाई भी की गई।
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पड़ोसी देश भी टेंशन में
दक्षिण अफ्रीका के मौजूदा हालात से पड़ोसी देश भी चिंतित हैं। कई देशों ने विशेष विमान और बसों की व्यवस्था की है, ताकि अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस ला सकें। दक्षिण अफ्रीका पुलिस के मुताबिक अब तक 25 हजार से अधिक लोगों को उनके देश भेजा जा चुका है।
नाइजीरिया ने हवाई जहाज से अपने 269 नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा घाना, मलावी, मोजाम्बिक और जिम्बाब्वे भी बस और जहाज से अपने नागरिकों को वापस लाने में जुटे हैं। मलावी भी सात हजार से अधिक अपने नागरिकों को वापस ला चुका है।
विदेशी लोग क्या-क्या झेल रहे?
- 19 जून को विरोध प्रदर्शन के बाद पीटरमैरिट्जबर्ग शहर में 29 वर्षीय मलावी नागरिक को मार डाला गया।
- डर के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों को छोड़ दिया है। वे अब फुटपाथ पर रहने को मजबूर हैं।
- दक्षिण अफ्रीका में वर्षों से जो भी पूंजी कमाई थी, लोगों को उसे छोड़कर अपने देश लौटना पड़ रहा है।
- विदेशी लोगों को खुलेआम घर जलाने और परिवार को जान से मार डालने की धमकियां मिल रही हैं।
विदेशियों के खिलाफ हिंसा का पुराना इतिहास
दक्षिण अफ्रीका में विदेशी विरोधी भावना का फैलना कोई नहीं बात नहीं है। यहां विदेशी नागरिकों के खिलाफ हिंसा का पुराना इतिहास है। करीब 9 साल पहले 2015 में विदेशी विरोधी भावना भड़की थी। इसमें पांच लोगों की जान गई थी। वहीं 18 साल पहले यानी 2008 में सबसे व्यापक स्तर पर विदेशी विरोधी हिंसा में 62 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। डेढ़ लाख से अधिक लोगों को अपना घर-द्वार छोड़ना पड़ा था।
दक्षिण अफ्रीका में विदेशियों का विरोध क्यों?
दक्षिण अफ्रीका के लोगों को लगता है कि विदेशी नागरिकों ने यहां आकर उनकी नौकरियां छीन ली हैं। देश में अपराध और बढ़ती बेरोजगारी के पीछे विदेशी लोग ही हैं। नफरत की एक वजह यह है कि विदेशी नागरिक स्थानीय लोगों की तुलना में कम वेतन पर काम करने पर राजी हो जाते हैं।
उधर, दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने भी अवैध अप्रवासन के खिलाफ अपना एक्शन शुरू किया है। जनवरी से अब तक 50 हजार से अधिक अवैध विदेशियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हजारों की संख्या में विदेशियों के देश छोड़कर चले जाने से अचानक स्थानीय लोगों को नौकरियां मिलने लगी हैं। दक्षिण अफ्रीका में बेरोजगारी दर 30 फीसद से अधिक है। प्रवासियों के खिलाफ नफरत की यह भी एक अहम वजह है।












