नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शनिवार को सातवें दिन में पहुंच गई। कॉकरोच जनता पार्टी का दावा है कि वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है और अब तक उनका करीब 5 किलोग्राम वजन कम हो चुका है। संगठन परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।
पीटीआई के अनुसार, CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि वांगचुक की तबीयत हर दिन खराब होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की और वांगचुक के स्वास्थ्य को कोई नुकसान पहुंचा, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। डिपके ने यह भी सवाल उठाया कि कथित परीक्षा अनियमितताओं के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान को अब तक पद से क्यों नहीं हटाया गया।
हालांकि, शुक्रवार देर रात वांगचुक ने केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लद्दाख मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए सरकार का धन्यवाद, लेकिन अब शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं, लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने भी कहा कि केंद्र के साथ बातचीत का गतिरोध खत्म हो गया है और अगले दौर की वार्ता का रास्ता साफ हो गया है।
इस बीच, जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन से जुड़े छह छात्र भी अलग मंच पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनका प्रदर्शन शनिवार को 15वें दिन में पहुंच गया। इस आंदोलन को कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है।
20 जून से शुरू हुआ CJP का आंदोलन NEET सहित कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर जारी है।












