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स्वामी विवेकानंद का जीवन भारत की सनातन चेतना का एक जीवंत प्रकाश-स्तंभ : आनंदी बेन पटेल

लखनऊ। स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को जन भवन में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। जन भवन के अधिकारियाें एवं कर्मचारियों ने भी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र एवं समाज की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इस अवसर पर जन भवन के शिक्षा विभाग की ओर से स्वामी विवेकानंद के जीवन, व्यक्तित्व एवं विचारों पर आधारित सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। इसमें “स्वामी विवेकानंद की बातें अमल में लाओ” गीत पर भावपूर्ण समूह गायन हुआ। वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के दिए गए ऐतिहासिक उद्बोधन के अंशों की नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से स्वामी के सार्वभौमिक बंधुत्व, मानवता, सहिष्णुता एवं भारतीय संस्कृति के शाश्वत संदेश को सजीव एवं प्रभावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया गया।

इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन भारत की सनातन चेतना का एक जीवंत प्रकाश-स्तंभ है। उन्होंने अपने अल्प जीवनकाल में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का ऐसा विराट संचार किया, जिसका प्रभाव आज भी संपूर्ण विश्व अनुभव कर रहा है।

स्वामी विवेकानंद दूरदर्शी राष्ट्रचिंतक, युवा शक्ति के प्रखर प्रेरणा-स्रोत तथा ऐसे युगद्रष्टा थे, जिन्होंने उस समय भारत के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना की, जब देश राजनीतिक पराधीनता और मानसिक निराशा के दौर से गुजर रहा था। उन्होंने संसार को यह संदेश दिया कि भारत मानवता, करुणा, सहिष्णुता, ज्ञान, आध्यात्मिकता तथा ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ की अनंत परंपरा का प्रतिनिधि है और विश्व को नैतिक एवं आध्यात्मिक नेतृत्व प्रदान करने की क्षमता रखता है।

राज्यपाल ने कहा कि किसी भी महापुरुष का सच्चा सम्मान उनके विचारों को अपने आचरण, कार्य और जीवन में उतारने से होता है। उन्होंने कहा कि आज जब भारत विकसित भारत-2047 के संकल्प के साथ आत्मनिर्भरता, नवाचार, समावेशी विकास और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब स्वामी विवेकानंद का यह संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर अनंत शक्ति निहित है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने, जागृत करने और सही दिशा में प्रयुक्त करने की है।

राज्यपाल ने कहा कि आज विश्व संघर्ष, असहिष्णुता, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता तथा विभिन्न मानवीय संकटों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद के विचार हमें स्मरण कराते हैं कि स्थायी शांति शक्ति के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, संवाद और साझा उत्तरदायित्व से स्थापित होती है।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का सबसे बड़ा विश्वास युवा शक्ति पर था। उनका प्रेरक संदेश “उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए” आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक है। स्वामी विवेकानंद ने महिलाओं की शिक्षा एवं सम्मान को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माना तथा सेवा को साधना की संज्ञा दी। उनका विश्वास था कि मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना है।

राज्यपाल ने स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर सभी से संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि हम अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें। समाज में सद्भाव, समरसता और संवेदनशीलता को सुदृढ़ करें। शिक्षा को चरित्र निर्माण का माध्यम बनाएं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग मानव कल्याण के लिए करें। पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप दें तथा महिलाओं, युवाओं एवं वंचित वर्गों के सशक्तिकरण को अपना सामाजिक दायित्व मानते हुए विकसित, आत्मनिर्भर, समरस, शिक्षित एवं संस्कारित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी (शिक्षा) डॉ. पंकज एल. जानी, उपसचिव (शिक्षा) हेमंत कुमार चौधरी, विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, विशेष कार्याधिकारी अशोक देसाई सहित जनभवन के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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