बस्ती: हत्या के मामले में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास

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बस्ती। हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुलदीप सक्सेना की अदालत ने आरोपी पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक आरोपी पर 11-11 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड न देने पर पांच माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।

डीजीसी क्रिमिनल परिपूर्णानंद पांडेय व एडीजीसी कमलेश चौधरी ने अदालत को बताया कि वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के बांसापार निवासी राम सहाय ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि घटना 28 मार्च 2014 की है।उनके पड़ोसी परशुराम से उनका पुरानी जमीन की रंजिश चल रही है। रंजिश के कारण परशुराम व उनके बीच जून 2013 में मारपीट हुई थी। परशुराम व उनके परिजनों ने राम सहाय की पत्नी को मारापीटा। घटना में उनकी पत्नी के पेट में पल रहा चार माह का गर्भ भी नष्ट हो गया था। मामले में न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ था।

इसी मुकदमे में सुलह के लिए परशुराम व उनके पुत्र अशोक व संजय 28 मार्च की सुबह उसके घर पर चढ़ आए और सुलह करने की धमकी देने लगे। इन्कार करने पर बड़े भाई केशवराम पर लोहे की राॅड से हमला कर दिया। जैसे ही केशवराम जमीन पर गिरे तो संजय ने हाथ में ली कुदाल से हमला कर दिया। बचाव में आईं राम सहाय की पत्नी पर परशुराम ने लाठी से हमला कर दिया। सूचना पर पहुंची 108 एंबुलेंस से केशवराम को पीएचसी सल्टौआ ले गई। जहां से चिकित्सक ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
स्थिति में सुधार न होने पर चिकित्सक ने गोरखपुर रेफर कर दिया। हालत गंभीर देकर गोरखपुर से उन्हें लखनऊ रेफर किया गया। लखनऊ ले जाते से रास्ते में केशवराम की मौत हो गई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने संजय, अशोक व परशुराम के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज किया। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। नाबालिग होने के कारण अशोक की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड में चल रही है। घटना के समर्थन में नौ गवाहों की गवाही और मेडिकल व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर दोनों आरोपी संजय और उनके पिता परशुराम को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।