‘हमारे 2, तो आपके 40 बच्चे क्यों?..गंगा जमुनी तहजीब केवल कहने को

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‘हमारे 2, तो आपके 40 बच्चे क्यों?’:देवकीनंदन बोले-गंगा जमुनी तहजीब केवल कहने को; संसद में एडवोकेट-बिजनेसमैन की बजाय धर्माचार्य जाएं

प्रख्यात कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर आगरा की जामा मस्जिद को लेकर फिर से मुखर हो गए हैं। उन्होंने कहा, ”कृष्ण जन्माष्टमी तक मेरी अपील है कि मुस्लिम भाई जामा मस्जिद की सीढ़ियों में पैर न रखें। वहां हमारे आराध्य कृष्ण की मूर्तियां हैं। वहीं, यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कथावाचक ने कहा कि मैं 1 शादी करूंगा, आप 4 कैसे करेंगे? मेरे 2, तो आपके 40 बच्चे क्यों होंगे? ​​

​​​​​​​​​​​इसके अलावा उन्होंने धर्माचार्यों के सांसद और विधायक बनने, स्कूलों में पढ़ाई और समाजवादी पार्टी पर खुलकर अपने विचार रखे। देवकीनंदन ठाकुर इन दिनों कानपुर में कथा के सिलसिले में आए हैं। उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। चलिए, अब आपको उनसे हुई बातचीत के अंश पढ़ाते हैं…

देवकीनंदन ठाकुर आगरा के जामा मस्जिद में मुस्लिम के प्रवेश पर सवाल खड़े किए हैं।
देवकीनंदन ठाकुर आगरा के जामा मस्जिद में मुस्लिम के प्रवेश पर सवाल खड़े किए हैं।
सवाल- जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे भगवान कृष्ण की मूर्ति दबी है, ये कैसे पता?
जवाब- मूर्तियां दबी हैं, ये हम नहीं कह रहे, ये तो प्रमाण मिल रहे हैं। औरंगजेब ने 1670 में काशी, मथुरा और आगरा में मंदिर तोड़े। इतिहासकारों और गुरु ग्रंथ साहिब में इसका वर्णन किया गया। मथुरा का नाम बदलकर इस्लामाबाद कर दिया गया था। अंग्रेज कलेक्टर, पेरिस और फ्रांस के पत्रकारों ने अपनी किताब में जिन फतवों का जिक्र किया, उसमें ये प्रमाण मिलते हैं।

सवाल- आप कह रहे हैं कि भाईचारा सिर्फ दिखावा मात्र रह गया है?

देवकीनंदन ठाकुर के अनुसार, औरंगजेब ने 1670 में काशी, मथुरा और आगरा में मंदिर तोड़े।
देवकीनंदन ठाकुर के अनुसार, औरंगजेब ने 1670 में काशी, मथुरा और आगरा में मंदिर तोड़े।
जवाब- हमने जब कोर्ट में केस किया था, उससे पहले भी 5 दिन का वक्त दिया था। कोर्ट केस के बाद अब 5 महीने हो गए। अब वो कोर्ट में खड़े होकर कह रहे हैं कि हमें तो कोई नोटिस नहीं मिला। कोई जानकारी नहीं है।

ये लोग कोर्ट में भी खड़े होकर झूठ बोल रहे हैं। 75 साल से भाईचारे के साथ जी रहे थे। गंगा-जमुनी तहजीब हम सुनते आ रहे हैं, हमें तो कहीं नहीं दिख रही। पाकिस्तान, बांग्लादेश में भी भाईचारा देखा। वहां भाईचारा 10% से भी कम रह गया है।

सवाल- कोर्ट के बाहर भी दूसरा रास्ता अपनाएंगे। क्या है वो रास्ता?
जवाब- हम कोर्ट का पूरा सम्मान करते हैं। अगर कोर्ट से हल नहीं निकलेगा, तो हम आंदोलन का दूसरा रास्ता अपनाएंगे। वो वक्त के साथ सभी को पता चल जाएगा।



सवाल- आपको लगता है कि जन्माष्टमी तक के लिए आपकी बात मुस्लिम भाई मानेंगे?
जवाब- मैं अपील तो कर ही सकता हूं। 7 सितंबर को जन्माष्टमी है। हमारे लिए न सही कम से कम 100 करोड़ लोगों की आस्था का ख्याल तो उन्हें रखना ही चाहिए। हम तो ये कह रहे हैं, उनका नुकसान क्या है? तकनीक से जांच करा लें सीढ़ियों के नीचे मूर्तियां हैं या नहीं। हम वो मूर्तियां निकाल लेंगे और उसका जो भी खर्च आएगा, हम वो भी भर देंगे। कोर्ट में अब 21 सितंबर को सुनवाई का समय दिया गया है।

देवकीनंदन ने कहा कि गंगा-जमुनी तहजीब हम सुनते आ रहे हैं, हमें तो कहीं नहीं दिख रही।
देवकीनंदन ने कहा कि गंगा-जमुनी तहजीब हम सुनते आ रहे हैं, हमें तो कहीं नहीं दिख रही।
सवाल- मंदिरों के आसपास दूसरे धार्मिक स्थलों का निर्माण, क्या सुनियोजित प्लानिंग है?
जवाब- ये पूरी तरह सच है कि प्लानिंग के साथ पूरा काम किया गया। देश के अंदर 4 लाख मंदिरों को तोड़ा गया, ये सुनियोजित नहीं था क्या? इतने मंदिर किस लिए तोड़े गए थे। आज मैं मंदिरों की बात कर रहा हूं, तो दिक्कत क्या है? हम तो कोर्ट के माध्यम से मांग रहे हैं। राम, कृष्ण और शिव के सम्मान के लिए लोग मुझे बुरा मानते हैं, तो मानें। उनके सम्मान में बुरा था, बुरा हूं और बुरा बनता रहूंगा।

सवाल- धर्माचार्य सांसद और विधायक बनें, ये आप बार-बार क्यों कहते हैं?
जवाब- मैं इसका जवाब देने से पहले बता दूं कि मुझे कभी चुनाव नहीं लड़ना है। मैं ये बात इसलिए बार-बार कहता हूं कि संसद में जब धर्माचार्य जाएंगे, तो वो रामराज्य की असल सदन होगी। संसद में एडवोकेट, बिजनेसमैन और समाजसेवी क्या कर रहे हैं? संसद में धर्माचार्य जाएंगे तो समाज और देश को सही दिशा देंगे।

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, “आज मैं मंदिरों की बात कर रहा हूं तो दिक्कत क्या है। हम तो कोर्ट के माध्यम से मांग रहे हैं।”
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, “आज मैं मंदिरों की बात कर रहा हूं तो दिक्कत क्या है। हम तो कोर्ट के माध्यम से मांग रहे हैं।”
सवाल- आप लगातार कहते हैं कि बच्चों में संस्कार कम हो रहे हैं?
जवाब- स्कूलों में कल्चरल फंक्शन के नाम पर छोटी-छोटी बच्चियों को डांस कराया जा रहा है। भजनों पर नृत्य क्यों नहीं कराया जाता? क्यों सिर्फ गानों पर डांस होगा? संस्कृत की किताब, रामचरितमानस, धार्मिक ग्रंथ हटा दिए गए। स्कूल सरस्वती के मंदिर कहे जाते हैं। अब स्कूल बॉलीवुड के मंदिर बनकर रह गए हैं।

सवाल- भारत चांद पर पहुंच गया, अखिलेश यादव ने कहा- चांद मुबारक?
जवाब- भारत के वैज्ञानिकों ने खूब नाम रोशन किया है। चांद होगा किसी के लिए हमारे लिए चंद्रमा है। चंदा मामा हम सनातनियों के लिए पूर्वज ही रहेंगे।

सवाल- यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या देश में लागू होना चाहिए?
जवाब- देश में जब ट्रेन, फ्लाइट, चंद्रमा, सूर्य, स्कूल सबके लिए एक बराबर है तो फिर कानून अलग-अलग क्यों। मैं 1 शादी करूंगा, आप 4 कैसे करेंगे? मेरे 2, तो आपके 40 बच्चे क्यों होंगे? देश सबका है, तो जिम्मेदारी भी सभी की होनी चाहिए। देश हित में सुरक्षा के लिए ये कानून बहुत जरूरी है।

मोतीझील ग्राउंड में तीसरे दिन मंगलवार को हजारों की संख्या में कथा सुनने के लिए भक्त पहुंचे थे।
मोतीझील ग्राउंड में तीसरे दिन मंगलवार को हजारों की संख्या में कथा सुनने के लिए भक्त पहुंचे थे।
सवाल- कुछ लोग मांग कर रहे हैं कि 370 को फिर से लागू किया जाए?
जवाब- इस पर मेरा कोई अधिकार नहीं कि राजनीतिक वक्तव्य दूं। लेकिन एक भारतीय और यहां का वोटर होने के नाते मैं कभी नहीं चाहता हूं कि 370 हटाई जाए। इसे लागू रहना चाहिए। 4 लाख कश्मीरी पंडितों को मारकर भगाया गया था। जो ये कह रहे हैं कि वो 4 लाख में 40 बचाकर ले आएं या अपने घर के 4 बच्चों को बलिदान करके देख लें।

सवाल- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए क्या कहेंगे?
जवाब- योगी जी की कार्यशैली बेहद शानदार है। योगी जी को बुलडोजर कम पड़ें, तो दो-चार बुलडोजर मैं अपने पास से दे दूं। यही कारण है कि यूपी ही नहीं, दूसरे प्रदेश में भी उनको लाने की मांग उठने लगी है।

देवकीनंदन ठाकुर महाराज के सानिध्य में 20 अगस्त से 28 अगस्त तक मोतीझील ग्राउंड में श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है।
देवकीनंदन ठाकुर महाराज के सानिध्य में 20 अगस्त से 28 अगस्त तक मोतीझील ग्राउंड में श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है।
देवकीनंदन ठाकुर महाराज के सानिध्य में 20 अगस्त से 28 अगस्त तक 11 लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन मोतीझील ग्राउंड में किया जा रहा है। श्री शिव महापुराण कथा के छठें दिन की शुरुआत विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। जिसके बाद महाराज ने भक्तों को ‘मेरी भई श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने’ भजन का श्रवण कराया।