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‘420 गिरोह के जाल में फंसे कांग्रेसी! धीरेंद्र प्रताप भड़के—बीजेपी एजेंट होने की जताई आशंका’

गाजियाबाद। देहरादून, उत्तराखंड कांग्रेस में कथित ठगी कांड को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं का ‘420 गिरोह’ के जाल में फंसना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी चुनावी मोड में है और ऐसे समय में इस तरह की घटनाएं संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। धीरेंद्र प्रताप ने इशारों-इशारों में बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि पकड़ा गया कथित 420 ‘बीजेपी का एजेंट’ भी हो सकता है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

राजनेता पहचान नहीं पाए तो यह गंभीर चूक

धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि 420 हर माहौल में सक्रिय रहते हैं, लेकिन अगर अनुभवी नेता ही उन्हें पहचान नहीं पा रहे हैं तो यह बेहद दुखद है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को आगाह करते हुए कहा कि कोई भी कदम उठाने से पहले गंभीर सोच-विचार जरूरी है।

गणेश गोदियाल का बचाव, छवि खराब करने की साजिश का आरोप

उन्होंने गणेश गोदियाल का बचाव करते हुए कहा कि वह ‘शरीफ और भोले-भाले’ नेता हैं और उनकी छवि खराब करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। उन्होंने भरोसा जताया कि एक सप्ताह के भीतर ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ हो जाएगा।

बीजेपी पर निशाना, सीएम धामी से जांच की मांग

धीरेंद्र प्रताप ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की कि मामले की गहराई से जांच कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आज कांग्रेस के लोग ठगे जा रहे हैं, तो कल बीजेपी के लोग भी निशाने पर आ सकते हैं।

‘कांग्रेस हारी है, हिम्मत नहीं’

चुनावी नतीजों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हार जरूर हुई है, लेकिन पार्टी का मनोबल टूटा नहीं है। राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में पार्टी नई रणनीति के साथ मजबूती से वापसी करेगी।

उत्तराखंड के नेताओं पर जताया भरोसा

धीरेंद्र प्रताप ने हरीश रावत, करण माहरा, प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य और हरक सिंह रावत को ‘जमीनी नेता’ बताते हुए कहा कि इनकी ताकत से ही बीजेपी घबराई हुई है।

ठगी कांड ने उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर हलचल जरूर मचा दी है, लेकिन पार्टी नेतृत्व इसे साजिश मानते हुए जवाबी हमले के मूड में दिख रहा है। अब सबकी नजर जांच पर टिकी है—क्या सच में कोई बड़ा राजनीतिक खेल चल रहा है?

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