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भीलवाड़ा: एमसीएच में छह दिन में 5 प्रसूताओं की मौत, सिजेरियन ऑपरेशन के बाद बिगड़ी थी हालत


भीलवाड़ा एमसीएच में जुलाई के पहले 11 दिनों में पांच प्रसूताओं की मौत हुई।
मार्च से अब तक प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा नौ पहुंच गया है।
सभी मृत महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी।

भीलवाड़ा। कोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल का मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) सवालों के घेरे में है। यहां पिछले छह दिन में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है।
सभी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।शुक्रवार को पोटला निवासी संगीता जीनगर (32) की सिजेरियन डिलीवरी के बाद हालत बिगड़ गई। उन्हें मेडिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।इससे पहले 5 जुलाई को शिमला गुर्जर, 7 जुलाई को फोरी देवी, 8 जुलाई को ईशा पांडे और 9 जुलाई को दिव्या की भी प्रसव के बाद मौत हो चुकी है।
पांचों मामलों में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मार्च से अब तक महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा नौ पहुंच चुका है। इनमें से पांच मौतें सिर्फ जुलाई के पहले 11 दिनों में हुई हैं।एमसीएच में नियमित उपयोग के लिए पांच और इमरजेंसी के लिए तीन यानी कुल आठ सर्जिकल सेट उपलब्ध हैं। जबकि यहां रोजाना 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
एक सर्जिकल सेट को दोबारा उपयोग में लेने से पहले कम से कम तीन घंटे की स्टरलाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे में क्षमता से अधिक ऑपरेशन होने के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।इसी बीच ऑपरेशन थिएटर की कल्चर रिपोर्ट पॉजिटिव आने से अस्पताल की संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संक्रमण का इन मौतों से सीधा संबंध है या नहीं।महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। उनका कहना है कि अधिकांश मरीज दूसरे अस्पतालों से गंभीर हालत में रेफर होकर आते हैं।
एमसीएच प्रबंधन के अनुसार प्रसूताओं की मौत पल्मोनरी एम्बोलिज्म, एस्पिरेशन, गंभीर एनीमिया, प्रेग्नेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन (पीआईएच), एक्लेम्पसिया और अन्य प्रसूति संबंधी जटिलताओं के कारण हुई है।उल्लेखनीय है कि राजस्थान में सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। मई में कोटा के सरकारी अस्पताल में पांच प्रसूताओं की मौत हुई थी।
जून में बीकानेर में सिजेरियन के बाद छह महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी, जिनमें से दो की इलाज के दौरान मौत हुई। अब भीलवाड़ा में लगातार पांच मौतों ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
 
 

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