शिवसेना (उद्धव बाला साहब) ठाकरे का संसदीय दल अब टूट चुका है। सोमवार को पार्टी के 9 में से 6 यानी दो तिहाई सांसद शिवसेना यानी एकनाथ शिंदे की पार्टी में शामिल हो गए। पाला बदलते समय इन नेताओं ने कई मुद्दे गिनवाए जिनमें सबसे अहम यह था कि उन्हें काम के लिए फंड मिलने में दिक्कत आ रही थी। पाला बदलने वाले सांसदों में से एक ओम प्रकाश राजे निंबालकर ने कहा कि उन्हें उद्धव ठाकरे से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन वह फंड की कमी के चलते मौजूदा सरकार के साथ जा रहे हैं। हालांकि, इन नेताओं ने स्पष्ट तौर पर यह नहीं बताया कि किस तरह के फंड की बात हो रही है। हकीकत यह है कि सांसद निधि खर्च करने के मामले में महाराष्ट्र के सभी सांसद फिसड्डी हैं और राज्य कुल 36 में से 27वें नंबर पर है। महाराष्ट्र के लोकसभा सांसदों ने 2024 से अब तक सिर्फ 13.37 प्रतिशत सांसद निधि ही खर्च की है।4
अब इस दल बदल का असर यह हुआ है कि अब महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा लोकसभा सांसद शिवसेना के पास हैं और नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (NDA) में एकनाथ शिंदे की स्थिति मजबूत हुई है। दूसरी तरफ, उद्धव ठाकरे की पार्टी की ओर से इन सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है। अब लोकसभा के स्पीकर से इन नेताओं की सदस्यता खत्म करने की मांग की जाएगी। उद्धव गुट का दावा है कि इन सांसदों ने पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया है। हालांकि, हम बात कर रहे हैं सांसदों के फंड और उसके खर्च को लेकर। इसकी जानकारी के लिए हमने सांसद निधि का डेटा निकाला है और यह देखा है कि शिवसेना (UBT) छोड़ने वाले इन सांसदों को फंड की दिक्कत हो रही थी कि नहीं?
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सांसद निधि को समझिए
सबसे पहले तो यहां यह समझना जरूरी है कि सांसद निधि का मामला क्या है। दरअसल, हर सांसद को हर साल 5 करोड़ रुपये का फंड मिलता है। मतलब 5 साल में 25 करोड़ रुपये। यह पैसा इकट्ठा भी होता जाता है। मतलब अगर इस साल 3 करोड़ ही खर्च हुए तो अगले साल के पांच में 2 और मिलाकर कुल 7 करोड़ रुपये हो जाएंगे। इस राशि को खर्च करने के लिए सांसद बताते हैं कि काम क्या करवाना है और स्थानीय जिलाधिकारी काम करवाते हैं। एक और बात है कि यह सांसद निधि अपने आप खाते में आती रहती है और इसके लिए किसी की सिफारिश की जरूरत नहीं होती है। खर्च करने के लिए जिलाधिकारी और सांसद की मंजूरी जरूरी होती है।
किसने, कितना खर्च किया?
अगर महाराष्ट्र की बात करें तो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर कुल 36 में से 27वें नंबर पर महाराष्ट्र है। यानी सांसद निधि खर्च करने के मामले में महाराष्ट्र काफी पीछे है। महाराष्ट्र में लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 63 सांसद हैं और ये सांसद सिर्फ 15.40 प्रतिशत सांसद निधि ही खर्च कर पाए हैं। अगर सिर्फ लोकसभा सांसदों की बात करें तो 13.37 प्रतिशत फंड ही खर्च हुआ है।
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संजय जाधव– परभणी के लोकसभा सांसद संजय जाथव को 2024 के बाद से अभी तक 14.70 करोड़ का फंड मिला है जिसमें से वह सिर्फ 3.78 करोड़ रुपये यानी 25.72 पर्सेंट फंड ही खर्च कर पाए हैं।
संजय देशमुख- यवतमाल वाशिम लोकसभा सीट से सांसद संजय देशमुख को कुल 18.56 करोड़ रुपये का फंड मिला है जिसें से वह सिर्फ 1.42 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाए हैं जो कि सिर्फ 7.64 प्रतिशत ही बनता है।
नागेश पाटिल- हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल भी फंड खर्च करने के मामले में काफी पीछे हैं। वह 19.02 करोड़ रुपये में से सिर्फ 26.64 प्रतिशत यानी 5.06 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाए हैं।
भाऊसाहब वाकचौरे– शिरदी के सांसद भाऊसाहब राजाराम वाकचौरे को 14.70 करोड़ का फंड मिला लेकिन वह सिर्फ 71.30 लाख रुपये यानी 4.85 प्रतिशत फंड ही खर्च कर पाए।
संजय दीना पाटिल- मुंबई नॉर्थ ईस्ट लोकसभा सीट से सांसद संजय दीना पाटिल 14.70 करोड़ रुपये में से सिर्फ 15.59 लाख रुपये ही खर्च कर पाए। यह कुल फंड का सिर्फ 1.06 पर्सेंट ही है।
ओम प्रकाश राजे निंबालकर- उस्मानाबाद से सांसद ओम प्रकाश राजे ही वह शख्स थे जिन्होंने सबसे पहले फंड की कमी की बात कही। उनको मिले 18.47 करोड़ रुपये में से वह सिर्फ 10.71 प्रतिशथ यानी 1.97 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाए।
बाकी सांसदों ने कितने पैसे खर्च किए?
शिवसेना (UBT) ना छोड़ने वाले सांसदों में से अरविंद सावंत ने 14.70 करोड़ में से 2.88 करोड़, अनिल देसाई ने 14.70 करोड़ में से 58.95 लाख और राजाभाऊ वाजे ने 15.28 करोड़ में से 2.13 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यानी जिन सांसदों ने पाला नहीं बदला है वे भी अपना फंड नहीं खर्च कर पाए हैं।
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अगर सबसे ज्यादा फंड खर्च करने वाले सांसदों की बात करें तो टॉप 5 में शामिल पांच सांसद पांच अलग पार्टियों के हैं। मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से बीजेपी की सांसद वर्षा गायकवाड़ ने सबसे ज्यादा 56.85 प्रतिशत यानी 14.70 करोड़ में से 8.35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। दूसरे नंबर पर एनसीपी के सुनील तटकरे हैं और उन्होंने 4.99 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
तीसरे नंबर अमरावती से कांग्रेस के सांसद बलवंत बसंद वानखेड़े हैं और उन्होंने 6.73 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। चौथे नंबर पर औरंगाबाद के लोकसभा सांसद संदीपराव भूमरे हैं और उन्होंने 14.70 करोड़ में से 441 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पांचवे नंबर पर भिवंडी से शिवसेना के सुरेश म्हात्रे हैं जो सिर्फ 4.15 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाए हैं।
खर्च में पीछे हैं महाराष्ट्र के दिग्गज सांसद
कल्याण से सांसद और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे को मिले 14.70 करोड़ में से एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ है। इसी तरह नांदुरबार से लोकसभा सांसद जी के पडवी, ठाणे के सांसद नरेश गनपत म्हस्के ने भी एक भी रुपये खर्च नहीं किया गया। केंद्र सरकार में मंत्री प्रतापराव जाधव ने सिर्फ 12.08 लाख रुपये और प्रणीति शिंदे ने सिर्फ 34.98 लाख रुपये खर्च किए हैं।
अन्य राज्यों के सांसदों का क्या हाल है?
अगर सबसे ज्यादा निधि खर्च करने वाले सांसद की बात करें तो वह झारखंड की लोहरदगा सीट से कांग्रेस के सांसद सुखदेव भगत हैं। उन्होंने कुल 17.2 करोड़ में से 13.1 करोड़ रुपये खर्च कि किए हैं। दूसरे नंबर तमिलनाडु की कल्लाकुरिची लोकसभा सीट से डीएमके के सांसद डी मलैयरसन हैं जिन्होंने 11.8 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यूपी की हाथरस लोकसभा सीट से बीजेपी के सांद अनूप प्रधान 9.8 करोड़ रुपये खर्च करके तीसरे नंबर पर हैं।
अगर राज्यवार बात करें तो पूर्वोत्तर के राज्यों के बाद बड़े राज्यों में सबसे आगे उत्तर प्रदेश हैं। यूपी के 80 सांसदों ने कुल मिलाकर 39 प्रतिशत सांसद निधि खर्च की है। दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ है जहां 38.1 प्रतिशत सांसद निधि खर्च की गई है। पंजाब में 35.9 प्रतिशत, तमिलनाडु में 35.3 प्रतिशत, बिहार में 34.7 प्रतिशत और झारखंड में 34.4 प्रतिशत सांसद निधि खर्च की गई है। महाराष्ट्र में सिर्फ 13.4 प्रतिशत सांसद निधि ही खर्च की गई है।
हालांकि, ओडिशा, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़ और लद्दाख इस मामले में महाराष्ट्र से भी पीछे हैं।












