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बस्ती पुलिस लाइन परिसर में स्थित पुलिस अस्पताल खुद ही बदहाली का शिकार है। यह अस्पताल जर्जर भवन, टूटे दरवाजों और गंदगी से भरा है, जहां इमरजेंसी सेवाएं वर्षों से ठप पड़ी हैं। यहां वार्ड ब्वाय और स्वीपर तक नहीं हैं। गुरुवार दोपहर 12 बजे दैनिक भास्कर की पड़ताल में चौंकाने वाले दृश्य सामने आए। अस्पताल का पूरा भवन जर्जर था, दरवाजों के शीशे टूटे हुए थे और छत जगह-जगह से फटी हुई थी। परिसर में बिछी इंटरलॉकिंग ईंटें भी टूटी हुई थीं। मौके पर चीफ फार्मासिस्ट शिव शंकर पांडेय और नर्सिंग अर्दली अमेंद्र शर्मा मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि यह अस्पताल पहले 8 शैय्या युक्त था, लेकिन अब केवल 4 बेड ही उपलब्ध हैं। अस्पताल की बदहाली का आलम यह है कि पिछले पांच साल से यहां कोई वार्ड ब्वाय या स्वीपर नहीं है। पूर्व में तैनात वार्ड ब्वाय पांच वर्ष पहले सेवानिवृत्त हो गए थे, जिसके बाद से कोई नई तैनाती नहीं हुई। इमरजेंसी सेवाएं भी कई वर्षों से ठप हैं, और अस्पताल अब सिर्फ मरहम-पट्टी तक ही सीमित रह गया है। पुलिस लाइन में लगभग दो सौ पुलिस परिवार रहते हैं, जिनकी स्वास्थ्य सुविधाओं की जिम्मेदारी इसी अस्पताल पर है। हालांकि, अस्पताल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इन परिवारों को यहां से स्वास्थ्य लाभ मिलना मुश्किल है। फार्मासिस्ट ने बताया कि पुलिस ट्रेनिंग के दौरान यहां करीब 16 ओपीडी होती हैं, जबकि सामान्य दिनों में 4 या 5 ओपीडी दर्ज की जाती हैं। पुलिस अस्पताल की स्थिति के संबंध में डिप्टी सीएमओ डॉक्टर अशोक चौधरी से बात की गई। उन्होंने आश्वासन दिया कि स्थलीय निरीक्षण कर सभी खामियों को दूर किया जाएगा।
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बस्ती पुलिस अस्पताल बीमार, इमरजेंसी सेवाएं ठप:200 पुलिस परिवारों के लिए बना अस्पताल, वार्ड ब्वाय-स्वीपर तक नहीं
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