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बस्ती जनपद के कुदरहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्रसव के दौरान एक नवजात का सिर धड़ से अलग होने का गंभीर मामला सामने आया है। परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। पीड़िता के परिजनों के अनुसार, सात माह की गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उनके ससुर उसे कुदरहा सीएचसी ले गए थे। परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद महिला स्टाफ ने गर्भवती को दर्द का इंजेक्शन दिया और सामान्य प्रसव कराने का दबाव बनाया। इस प्रक्रिया में नवजात का धड़ बाहर आ गया, लेकिन उसका सिर गर्भ के अंदर ही रह गया। स्थिति बिगड़ने पर सीएचसी स्टाफ ने पीड़िता को एक निजी अस्पताल भेजा, जहां से उसे महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज (कैली) रेफर कर दिया गया। कैली अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के दौरान पाया कि नवजात का सिर अभी भी महिला के गर्भ में फंसा हुआ था। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके आदेश के बाद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को तत्काल मौके पर जांच के आदेश दिए गए। इसके बाद, संयुक्त निदेशक सुशील कुमार और सलाहकार प्रभाकर त्रिपाठी ने सीएचसी कुदरहा का निरीक्षण किया। जांच टीम ने आशा बहुओं, एम्बुलेंस चालक और अन्य स्टाफ के बयान दर्ज किए हैं। साथ ही, मानकों के विपरीत चल रहे निजी अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज का डीबीआर भी कब्जे में लिया गया है। संयुक्त निदेशक ने बताया कि लाभार्थियों (परिजनों) के बयान दर्ज होने के बाद दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन विस्तृत जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहा है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अश्विनी यादव ने बताया कि पीड़ित महिला 8 अप्रैल को सुबह एंबुलेंस से आई थी और नवजात का पैर बाहर था। गंभीर हालत देखते हुए प्रसूता को पहले ही अस्पताल रेफर कर दिया गया था।
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कुदरहा सीएचसी में प्रसव का मामला:जांच शुरू, स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप
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