बिजली से तेल तक….वैश्विक संकट में भी आत्मनिर्भर भारत की मजबूत रणनीति

    लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित रुकावट को वैश्विक चिंता का विषय बताया। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। पीएम ने दोहराया कि भारत हमेशा शांति, संवाद और मानवता के पक्ष में खड़ा रहा है और आगे भी यही रुख बनाए रखेगा।

    बिजली संकट की आशंका खारिज, कोयले का पर्याप्त भंडार

    प्रधानमंत्री ने देश में बिजली आपूर्ति को लेकर किसी भी तरह की कमी की आशंका को खारिज किया। उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी के बावजूद सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला उपलब्ध है। भारत ने लगातार दूसरे वर्ष 100 करोड़ टन से अधिक कोयला उत्पादन कर नई उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन और वितरण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, जिससे आपूर्ति निर्बाध बनी रहेगी।

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    इथेनॉल मिश्रण से तेल आयात में कमी

    तेल संकट से निपटने के उपायों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग की सफलता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जहां पहले ब्लेंडिंग मात्र 1% थी, अब यह करीब 20% तक पहुंच चुकी है। इसके परिणामस्वरूप भारत को पिछले वर्ष लगभग 4.5 करोड़ बैरल तेल आयात कम करना पड़ा। इसके अलावा रेलवे के विद्युतीकरण से हर साल लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है और मेट्रो नेटवर्क भी तेजी से विस्तारित हुआ है।

    विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा पर फोकस

    प्रधानमंत्री ने खाड़ी देशों में रह रहे लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय दूतावास और मिशन पूरी तरह सक्रिय हैं और जरूरत पड़ने पर सहायता के लिए हेल्पलाइन भी चालू हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम कर रही है ताकि किसी भी वैश्विक संकट का प्रभाव देश पर कम से कम पड़े।

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    जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती की अपील

    पीएम मोदी ने राज्य सरकारों से अपील की कि वे जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी निगरानी रखें। उन्होंने चेतावनी दी कि संकट के समय ऐसी गतिविधियां बढ़ सकती हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि आम जनता और किसानों पर इस वैश्विक स्थिति का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

    एकजुटता और संयम की अपील

    अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एकजुट रहने और शांत मन से चुनौतियों का सामना करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था और पिछले वर्षों की तैयारियां इस संकट में देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। पीएम ने भरोसा जताया कि देश मिलकर हर परिस्थिति का सामना कर सकता है।

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