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जिला कारागार में टीबी मुक्त अभियान शुरू:तीन दिवसीय विशेष स्वास्थ्य जांच, बंदियों की स्क्रीनिंग जारी


सिद्धार्थनगर में 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिला कारागार में तीन दिवसीय विशेष स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत चौरसिया ने इसका उद्घाटन किया। इस अभियान का उद्देश्य जेल में बंद कैदियों में क्षय रोग (टीबी) की समय पर पहचान कर उनका उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। कार्यक्रम के तहत अत्याधुनिक हैंड होल्ड एक्स-रे मशीन से बंदियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। इसके साथ ही, ड्यूल किट के माध्यम से एचआईवी और सिफिलिस जैसी बीमारियों की भी जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम बंदियों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार के प्रति जागरूक भी कर रही है। इस अवसर पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मृत्युंजय मणि त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम समन्वयक पंकज त्रिपाठी, जिला कारागार अधीक्षक सचिन वर्मा, जेलर राम सिंह यादव, उपकारापाल अजीत चंद, महेश सिंह, जेल फार्मासिस्ट वीरेंद्र प्रसाद और जिला पीपीएम सतीश मिश्रा सहित कई स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि यह विशेष अभियान आगामी तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें अधिक से अधिक बंदियों की जांच कर उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि जनपद को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। स्वास्थ्य विभाग के इस प्रयास को जेल प्रशासन का भी पूरा सहयोग मिल रहा है, जिससे अभियान को सफल बनाने में मदद मिल रही है। अभियान के तहत चिन्हित मरीजों को तत्काल उपचार योजना में शामिल कर उनकी नियमित निगरानी भी की जाएगी। कार्यक्रम में जिला कारागार अधीक्षक सचिन वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जेल प्रशासन इस अभियान में पूर्ण सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि बंदियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह के कार्यक्रमों से उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। इस मौके पर जेलर राम सिंह यादव, उपकारापाल अजीत चंद, महेश सिंह, जेल फार्मासिस्ट वीरेंद्र प्रसाद, जिला पीपीएम सतीश मिश्रा सहित स्वास्थ्य एवं कारागार विभाग के अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। जेल परिसर में चल रहे इस अभियान के तहत न केवल जांच बल्कि स्वास्थ्य परामर्श, जागरूकता और संक्रमण से बचाव के उपायों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। बंदियों को साफ-सफाई, संतुलित आहार और नियमित दवा सेवन के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के लक्षित अभियान से न केवल टीबी के मामलों की पहचान में तेजी आएगी, बल्कि समय पर उपचार से संक्रमण की श्रृंखला को भी तोड़ा जा सकेगा। जनपद को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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