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प्लास्टिक-पटाखा गोदाम में भीषण आग, धमाकों से दहला इलाका, काबू पाने की जद्दोजहद

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला मुख्यालय अंबिकापुर में एक प्लास्टिक और पटाखा गोदाम में लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते दो मंजिला इमारत इसकी चपेट में आ गई और आसपास के घरों तक लपटें पहुंच गईं।

घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है, जहां मुकेश प्लास्टिक नामक होलसेल दुकान में अचानक आग लग गई। दुकान में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक सामग्री और पटाखों का भंडारण किया गया था, जिससे आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्लास्टिक में आग लगने के बाद जैसे ही पटाखों ने आग पकड़ी, लगातार तेज धमाके होने लगे। धमाकों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा और घने काले धुएं का गुबार करीब 10 किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगा।

आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज एक घंटे के भीतर ही दो मंजिला इमारत पूरी तरह आग की चपेट में आ गई। लपटें दुकान से सटे एक मकान तक पहुंच गईं, जिससे वहां भी आग लग गई।

दोपहर करीब 12 बजे से आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। अब तक चार दमकल वाहनों की मदद से करीब 100 टैंकर पानी डाला जा चुका है, लेकिन आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है।

पिछले 8 घंटों से लगातार रेस्क्यू और फायर फाइटिंग ऑपरेशन जारी है। दरिमा एयरपोर्ट और कोयला खदान की फायर ब्रिगेड टीमें भी मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुटी हुई हैं। इसके बावजूद गोदाम से अब भी आग की लपटें उठ रही हैं।

फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग बुझने के बाद ही वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

घटना के बाद रिहायशी क्षेत्र में ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। निगम के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे खतरनाक सामान का आवासीय क्षेत्रों में रखा जाना बड़ी लापरवाही है।

कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। एहतियात के तौर पर आसपास के घरों को पहले ही खाली करा लिया गया था।

वहीं मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि शहर की कई गलियां इतनी संकरी हैं कि वहां फायर ब्रिगेड का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सड़कों के चौड़ीकरण में सहयोग करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

 

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