लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर चल रहे प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय, मेरठ पर सैकड़ों बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं एवं संविदा कर्मियों का विशाल जमावड़ा हुआ। इस दौरान प्रदेश के अन्य जनपदों में भी निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया तथा प्रभावी विरोध सभाएं आयोजित कर कर्मचारियों ने अपना आक्रोश प्रकट किया।

सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन की “डर और दमन” की नीति की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस नहीं ली गईं, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। उन्होंने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर गर्मियों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था बिगाड़ने की नियत का आरोप लगाते हुए कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने हाल ही में पनकी ताप बिजली घर और जवाहरपुर ताप बिजली घर के संचालन और अनुरक्षण का 25 साल के लिए निजी कंपनी को टेंडर जारी करने का फरमान निकाला है । यह सब कर्मचारियों के बीच में आंदोलन भड़काने वाला कदम है।
सभा को ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के सेक्रेटरी मुख्यालय दिल्ली के यशपाल शर्मा ने संबोधित किया। केन्द्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम, योगेन्द्र लाखा, आर सी पाल, सी पी सिंह ,एवं निखिल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया, गंगा कैनाल स्थित जल विद्युत परियोजनाओं को लीज पर देने तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए निजीकरण के प्रयास बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं-दोनों के हित में नहीं हैं।
वक्ताओं ने ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनियों के कार्यों तथा आगरा में टोरेंट पावर की फ्रेंचाइजी के खिलाफ उपभोक्ताओं से मिल रही लगातार शिकायतों और करार उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं शासन के साथ हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। मार्च 2023 के आंदोलन एवं सांकेतिक हड़ताल के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई दमनात्मक कार्रवाइयों-जैसे एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानांतरण एवं अनुशासनात्मक कार्यवाहियां-को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
इसके साथ ही डाउनसाइजिंग एवं वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर हटाए गए संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली, आउटसोर्स कर्मियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित करने, निलंबित कर्मचारियों की सम्मानजनक बहाली तथा लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
संघर्ष समिति ने मई 2025 में सेवा नियमों में किए गए संशोधनों को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए उनका विरोध किया और कहा कि बिना जांच, बिना सुनवाई और बिना स्पष्टीकरण का अवसर दिए सेवा समाप्ति जैसे प्रावधान पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। साथ ही फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर कार्रवाई तथा कर्मचारियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी कार्यवाहियों को तत्काल बंद करने की मांग की गई।
संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता, किसानों एवं उपभोक्ताओं से अपील की कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि सस्ती, सुलभ और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था को बचाने का साझा संघर्ष है। निजीकरण से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी। सभा में संघर्ष समिति ने संकल्प दोहराया कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंदोलन के दौरान भी निर्बाध एवं बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे और निजीकरण एवं उत्पीड़न के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेंगे।












