रेगिस्तान : रेगिस्तान अब बंजर नहीं बल्कि कमाई का अड्डा है. गुजरात और राजस्थान के किसान कम पानी वाली जादुई फसलों से अपनी किस्मत बदल रहे हैं. नई तकनीक से रेत में भी अब फसलें उगना मुमकिन हो गया है.
रेगिस्तान की तपती रेत अब किसानों के लिए सोना उगलने वाली है. क्योंकि गुजरात और राजस्थान के बेल्ट में ऐसी फसलों का दौर आ गया है जो कम पानी में भी बंपर पैदावार देती हैं. अब वो जमाना गया जब किसान सिर्फ बारिश के भरोसे बैठते थे. क्योंकि नई तकनीक और सूखे को झेलने वाली किस्मों ने रेगिस्तान की खेती का पूरा गणित ही बदल कर रख दिया है.
आजकल के स्मार्ट किसान बाजरा और ग्वार जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय पौधों पर फोकस कर रहे हैं जिनकी मार्केट वैल्यू बहुत ज्यादा है. राजस्थान के रेतीले टीलों और गुजरात के कच्छ जैसे इलाकों में अब खजूर और अनार की खेती ने धूम मचा रखी है. कम सिंचाई और ड्रिप इरिगेशन के कॉम्बिनेशन ने रेगिस्तानी मिट्टी को भी काफी ज्यादा उपजाऊ और कीमती बना दिया है.
अगर हम औषधीय खेती की बात करें तो एलोवेरा और अश्वगंधा जैसी फसलें इन राज्यों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हें ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती और जंगली जानवर भी इन्हें नुकसान नहीं पहुंचाते. जिससे किसानों की फालतू की मेहनत और सुरक्षा का खर्च बच जाता है. मार्केट में इनकी डिमांड इतनी है कि कंपनियां सीधे खेतों से माल उठा रही हैं.
गुजरात के किसानों ने तो ड्रैगन फ्रूट यानी कमलम उगाकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. रेगिस्तानी मौसम इस विदेशी फल के लिए एकदम परफेक्ट साबित हो रहा है और इसकी कीमत बाजार में हमेशा हाई रहती है. कम मेहनत में लाखों का मुनाफा देने वाली इस फसल ने युवाओं को भी वापस खेती की तरफ खींचना शुरू कर दिया है. जो एक बड़ा बदलाव है.
राजस्थान में जीरा और ईसबगोल की खेती ने भी वहां की इकॉनमी को जबरदस्त बूस्ट दिया है. यहां की गर्म हवाएं इन मसालों की क्वालिटी को और भी निखार देती हैं जिससे इनकी एक्सपोर्ट क्वालिटी बहुत बेहतरीन होती है. आज का किसान अब ग्लोबल मार्केट को ध्यान में रखकर प्लानिंग कर रहा है. जिससे उनकी जेब में पहले से कहीं ज्यादा पैसा आ रहा है.
सरकार भी अब इस मिशन में किसानों का पूरा साथ दे रही है और बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए भारी सब्सिडी दे रही है. सोलर पंप और पाइपलाइन बिछाने के लिए मिलने वाली मदद ने छोटे किसानों की भी हिम्मत बढ़ा दी है. अब किसान सिर्फ मेहनत नहीं कर रहे, बल्कि सरकारी स्कीमों का फायदा उठाकर बिजनेस माइंडसेट के साथ आगे बढ़ रहे हैं.
कुल मिलाकर देखें तो गुजरात और राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पानी की कमी अब कोई बहाना नहीं रही. बल्कि सही फसल का चुनाव और सोच में बदलाव ने किसानों को मालामाल कर दिया है. अगर आप भी इन इलाकों से हैं. तो ये फसलें आपके लिए तरक्की का सबसे आसान और पक्का शॉर्टकट साबित हो सकती हैं.
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