पिछले हफ्ते ब्रिक्स देशों के अधिकारियों की मध्य-पूर्व पर हुई बैठक में कोई आम सहमति वाला दस्तावेज नहीं बन सका। सदस्य देशों के बीच काफी तीखे मतभेद थे, खासकर उन देशों के बीच जो इस संघर्ष में सीधे शामिल हैं। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, बाकी सदस्यों ने मतभेदों को कम करने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
भारत इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। अगले महीने भारत विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा, जिसके बाद इस साल बाद में ब्रिक्स सम्मेलन होगा। सहमति न बन पाने के कारण पिछले हफ्ते जूनियर विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों की बैठक में कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका।
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मिडिल ईस्ट पर जताई चिंता
इसके बजाय केवल चेयरमैन का बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया कि सदस्य देशों ने मध्य पूर्व में हाल के संघर्ष पर गहरी चिंता जताई और इस मुद्दे पर अपने विचार और आकलन साझा किए। चर्चा में फिलिस्तीन मुद्दा, गाजा की स्थिति, मानवीय सहायता की व्यवस्था, यूएनआरडब्ल्यूए की भूमिका, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति और लेबनान में हुए सीजफायर का स्वागत शामिल था।
ईरान ने ब्रिक्स से अमेरिका के खिलाफ एकजुटता की अपील की थी और भारत से सहमति बनाने के लिए कहा था, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब जैसे देश, जो इस संघर्ष में शामिल हैं, भी ब्रिक्स में हैं। इसलिए संयुक्त बयान जारी करना मुश्किल रहा।
भारत ने बताया अपना स्टैंड
सरकारी सूत्रों ने साफ कहा कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे पर अपनी पोजीशन में कोई ढील नहीं देगा। भारत दो-राज्य समाधान (Two-State Solution) के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। एक सूत्र ने बताया, ‘फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत ने जनवरी 2026 में अरब लीग और फिलिस्तीन के साथ सहमति बनाई थी। भारत दो-राज्य समाधान का समर्थन करता रहा है।’ कई ब्रिक्स देशों ने शर्म अल-शेख शांति सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 का भी समर्थन किया था, जिसमें गाजा संघर्ष खत्म करने के लिए 20 सूत्री शांति योजना शामिल है।
भारत की फिलिस्तीन नीति पुरानी और स्थिर है। भारत हमेशा से बातचीत के जरिए दो-राज्य समाधान चाहता है, जिसमें एक संप्रभु, स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के अंदर बने, जो इजरायल के साथ शांति से साथ-साथ रहे। भारत फिलिस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता देने का भी समर्थन करता है।
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भारत ने दी मदद
गाजा संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत ने लगभग 70 मीट्रिक टन मानवीय सहायता दी है, जिसमें दो चरणों में 16.5 मीट्रिक टन दवाइयां और मेडिकल सप्लाई शामिल हैं। पिछले साल भारत ने यूएनआरडब्ल्यूए को 5 मिलियन डॉलर दिए थे और इस साल फिर 5 मिलियन डॉलर दिए गए। अक्टूबर-नवंबर 2024 में फिलिस्तीन स्वास्थ्य मंत्रालय और यूएनआरडब्ल्यूए को 65 टन दवाइयां भी भेजी गईं।












