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जिंदा किसान को सरकारी रिकॉर्ड में कर दिया मृत, योजनाओं का लाभ बंद, डीएम से लगाई न्याय की गुहार

कायमगंज, फर्रुखाबाद : सरकारी अभिलेखों में एक जीवित किसान को मृत घोषित किए जाने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। किसान का आरोप है कि वह पूरी तरह स्वस्थ और जीवित है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसकी मृत्यु दर्ज कर दिए जाने से उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत कई सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया है। परेशान किसान ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कर अभिलेखों में सुधार कराने की मांग की है।

 

कायमगंज क्षेत्र के ग्राम मड़ौल निवासी रामभजन पुत्र सुमेर ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि सरकारी अभिलेखों में 16 अक्टूबर 2025 को उसकी मृत्यु दर्ज कर दी गई। इतना ही नहीं, उसके नाम से 26 मई 2026 को मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया। जबकि वह आज भी जीवित है और अपने परिवार के साथ गांव में रह रहा है।

 

पीड़ित किसान का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के कारण उसके सामने गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्तें बंद हो गई हैं। इसके अलावा बैंकिंग कार्यों, सरकारी योजनाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ लेने में भी उसे लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसान का आरोप है कि कागजों में मृत घोषित किए जाने से उसकी पहचान और अधिकार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

 

रामभजन ने बताया कि वह कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागों के चक्कर लगा चुका है। उसने संपूर्ण समाधान दिवस में भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। किसान ने जिलाधिकारी से मामले की गहन जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा अभिलेखों में तत्काल संशोधन कर उसे जीवित घोषित किए जाने की मांग की है।

 

मामले को लेकर गांव में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जीवित होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज हो सकता है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

 

वहीं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजकिशोर ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। दूसरी ओर खंड विकास अधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि जिलाधिकारी से प्राप्त निर्देशों के अनुसार मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

 

अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। यदि किसान के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी अभिलेखों के रखरखाव और सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही का उदाहरण साबित हो सकता है।


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