डुमरियागंज विकास खंड के जमौता गांव में बना डॉ. अंबेडकर सामुदायिक केंद्र (विवाह घर) अपनी स्थापना के 14 साल बाद भी उपेक्षा का शिकार है। वर्ष 2009-10 में करीब 14 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह केंद्र आज तक गांव की किसी भी बारात के काम नहीं आ सका है। शासन की मंशा थी कि इन सामुदायिक केंद्रों का उपयोग ग्रामसभा की बैठकों, बारात ठहराने और सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन के लिए किया जाएगा। जमौती-जमौता गांव को 2009-10 में अंबेडकर ग्राम घोषित किए जाने के बाद ग्रामीणों में विकास की उम्मीद जगी थी। केंद्र के निर्माण से पहले ग्रामीणों को शादी-विवाह के दौरान बारातें बाग-बगीचों में ठहरानी पड़ती थीं, जिससे बरसात और ठंड में भारी दिक्कत होती थी। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ दबंगों ने इस योजना की मंशा पर पानी फेर दिया। केंद्र से मेज, कुर्सियां और पंखे तक गायब हो चुके हैं, जबकि कुछ लोग भवन का उपयोग अपनी कृषि उपज रखने के लिए कर रहे हैं। भवन की स्थिति भी बेहद जर्जर हो चुकी है। गेट, खिड़कियां, दरवाजे, छत और फर्श तक खराब हो गए हैं, जिससे इसका उपयोग पूरी तरह ठप है। ग्रामीण जग नारायण, हयतुल्लाह, घनश्याम, राम अजोरे, सर्वजीत और फूलचंद्र समेत कई लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों से केंद्र की मरम्मत कराकर इसे मूल उद्देश्य के लिए उपयोग में लाने की मांग की है।
जमौता का अंबेडकर सामुदायिक केंद्र बना बेकार:14 साल में एक भी बारात नहीं ठहरी, ग्रामीणों में रोष
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