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रक्षा मंत्री को ही जान से मार डाला, माली में हमले जारी, आखिर क्यों मचा है बवाल?

अफ्रीकी देश माली में जबरदस्त विद्रोह शुरू हो गया। विद्रोही गुटों को रविवार को जबरदस्त कामयाबी मिली जब एक सुनियोजित हमले में माली के रक्षा मंत्री नजरल सादियो कमारा को मार डाला गया। अब विद्रोहियों के हमले बढ़ते जा रहे हैं और उन्होंने कई शहरों और मिलिट्री स्टेशनों पर भी कब्जा कर लिया है। बेहद गरीब देशों में से एक माली लंबे समय से संघर्ष से जूझ रहा है और यहां की सेना भी विद्रोहियों के हमलों से परेशान हो रही है। कहा जा रहा है कि इस बार जिहादियों और विद्रोहियों ने पूरे देश में एकसाथ और जबरदस्त हमला किया है और उत्तरी माली पर विद्रोहियों ने कब्जा जमा लिया। इतना ही नहीं, अब वे राजधानी बमाको में घुसने की कोशिश कर रहे हैं और संघर्ष जारी है।

जुंटा के शासन वाले इस देश में हिंसा की ये ताजी ताजा घटनाएं हैं। माली लंबे समय से अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकवादियों के साथ-साथ उत्तर में अलगाववादी विद्रोह से जूझ रहा है। माली सरकार ने रक्षा मंत्रालय के फेसबुक पेज पर एक पोस्ट करके रक्षा मंत्री के मारे जाने की पुष्टि की और उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई। शनिवार को माली की राजधानी बमाको और कई अन्य शहरों पर एक साथ हमला हुआ जो देश की सेना पर अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक था। इस हमले ने माली के सुरक्षा साझेदार रूस को भी चुनौती दी, जिसके सैनिक इस पश्चिम अफ्रीकी देश में तैनात हैं।

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सरकार ने शनिवार के हमलों में मारे गए लोगों की संख्या अभी तक नहीं बताई है। पहले केवल यह कहा गया था कि कम से कम 16 लोग घायल हुए हैं। सरकार ने इसे आतंकी हमला करार दिया है। सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, शनिवार को रक्षामंत्री कमारा के आवास को एक आत्मघाती कार बम हमलावर और अन्य हमलावरों ने निशाना बनाया। बयान में कहा गया, ‘उन्होंने हमलावरों से लोहा लिया और उनमें से कुछ को मार गिराया लेकिन भीषण हमले में वह घायल हो गए और जब उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था तो रास्ते में ही दम तोड़ दिया।’

किदाल पर विद्रोहियों का कब्जा

अलगाववादी तुआरेगों की अगुवाई वाले अजावाद लिबरेशन फ्रंट के एक प्रवक्ता ने बताया कि शनिवार के हमले के बाद रूसी अफ्रीका कोर के सैनिक और माली की सेना किदाल शहर से हट गई और यह वापसी शांतिपूर्ण निकासी के एक समझौते के तहत हुई। इसके प्रवक्ता मोहम्मद अल मौलूद रमजान ने एलान किया, ‘किदाल आजाद हो गया है।’ रविवार देर रात सरकारी टेलीविजन पर जारी एक बयान में सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल उमर डियारा ने माना कि माली की सेना शहर छोड़ चुकी है और अब उसके दस्ते किदाल से करीब 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित शहर अनेफिस में तैनात हो रहे हैं।

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बता दें कि अलगाववादी कई सालों से उत्तरी माली में एक स्वतंत्र राज्य बनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। किदाल लंबे समय तक इस विद्रोह का गढ़ रहा था लेकिन 2023 में माली की सेना और रूसी के सैनिकों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। उस वक्त यह जुंटा और उसके रूसी साझेदारों के लिए एक बड़ी और प्रतीकात्मक जीत मानी गई थी।

क्या है विवाद की वजह?

माली में साल 2012 से ही इस्लामिक उग्रवादी गुट जैसे कि अलकायदा और अन्य आतंकी समूह बेहद सक्रिय हैं। इनकी लगातार सक्रियता के चलते पूरा देश बेहद संवेदनशील रहा है। ये आतंकवादी सरकार से लड़ते रहे हैं। दूसरी तरफ उत्तरी माली के लोग एक अलग और आजाद देश बनाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। अज़ावाद लिबरेशन फ्रंट (FLA) इन्हीं अलगाववादियों की लड़ाई लड़ रहा है।

2012 के मार्च महीने में जब विद्रोह ने तेजी पकड़ी थी तब फ्रांस की सेना की मदद से उन्हें रोका गया था। बाद में फ्रांस की सेना वहां से चली गई। संघर्ष चलता रहा और इसी का फायदा उठाकर सेना ने साल 2020 में पहली बार और फिर 2021 में फिर से तख्तापलट करते सरकार बना ली। मौजूदा वक्त में बाली में इसी मिलिट्री का ही शासन है। एक समय पर सेना के अधिकारी रहे आसिमी गोइता ही माली के राष्ट्रपति हैं।

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माली में हुए तख्तापलट के बाद से ही रूस का वैगनर ग्रुप इस्लामिक स्टेट के खिलाफ माली की सेना की मदद कर रहा था। हालांकि, जून 2025 में वैगनर ग्रुप भी माली छोड़कर चला गया। अभी भी रूस की सेना के जवान यहां मौजूद हैं। अब अफ्रीका कॉर्प्स भी यहां काम कर रहा है जो रूस के रक्षा मंत्रालय के अधीन आता है।

बता दें कि माली की सत्ता पर काबिज जुंटा ने सभी राजनीतिक दलों को खत्म कर दिया और अपने आलोचकों के खिलाफ क्रूरता से कार्रवाई की। जुंटा ने वादा भी किया था कि मार्च 2024 तक सत्ता जनता को सौंप दी जाएगी लेकिन बिना चुनाव कराए ही साल 2025 में गोइता ने खुद को फिर से अगले 5 साल तक के लिए घोषित कर दिया। साथ ही, यह भी नियम बना दिया कि वह जितनी बार चाहें उतनी बार बढ़ा सकते हैं।

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