गाजियाबाद। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासत तेज हो गई है। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने सरकार और जांच एजेंसियों पर सीधा हमला बोलते हुए साफ कहा है कि इस मामले में किसी भी तरह की ढील कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।
धीरेंद्र प्रताप और कमला पंत के नेतृत्व में दिल्ली और देहरादून के आंदोलनकारियों ने कल जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने धीरेंद्र प्रताप को सुबह करीब 10 बजे हिरासत में ले लिया और शाम तक रोके रखने के बाद रिहा किया। इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए प्रताप ने कहा कि देश में अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आजादी तक सीमित की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके दोनों मोबाइल फोन छीन लिए गए और उन्हें अपने वकील से संपर्क करने तक की अनुमति नहीं दी गई। इसे उन्होंने ‘मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन’ करार दिया। अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब तक दोषियों को सजा न मिलने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि उत्तराखंड की जनता इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। ‘अगर इस लड़ाई के लिए जेल भी जाना पड़ा, तो हम पीछे नहीं हटेंगे,’ उन्होंने दो टूक कहा।
धीरेंद्र प्रताप ने CBI की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जांच एजेंसी इस मामले में तत्परता नहीं दिखा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई कमजोर पड़ रही है, क्योंकि कुछ सत्ताधारी नेताओं के नाम इस प्रकरण में सामने आ रहे हैं।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘एक ओर ‘नारी वंदन’ की बात होती है, दूसरी ओर महिला उत्पीड़न के इतने गंभीर मामले में ठोस कार्रवाई से बचा जा रहा है।’
आगे की रणनीति का संकेत देते हुए उन्होंने बताया कि जल्द ही देहरादून में विपक्षी दलों और राज्य आंदोलनकारियों की एक बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया जाएगा। अंत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस या प्रशासनिक दबाव से इस मुद्दे पर उठ रही आवाज को दबाया नहीं जा सकता। ‘अंकिता भंडारी का मामला हमारी आन, बान और शान से जुड़ा है, और न्याय मिलने तक यह लड़ाई जारी रहेगी।’












