प्रयागराज। उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में दायर Contempt Application (Civil) No. 2817/2026 में आज सुनवाई हुई। यह याचिका आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा न्यायालय के पूर्व आदेशों दिनांक 27.02.2026 एवं 25.03.2026 की कथित अवहेलना को लेकर दाखिल की गई है।
याचिका में स्वयंभू/कथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, मुकुंदानंद ब्रह्मचारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि प्रतिवादीगण द्वारा न्यायालय के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की गई तथा न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया गया।
आज यह मामला कोर्ट नंबर 9 में फ्रेश केस के रूप में सूचीबद्ध था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने स्वयं उपस्थित होकर इन पर्सन अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। उन्होंने न्यायालय के समक्ष पूर्व में प्राप्त सुरक्षा संबंधी धमकियों एवं पाकिस्तान से मिली धमकी का भी उल्लेख किया तथा कहा कि उन्हें लगातार जान-माल का खतरा बना हुआ है।
सुनवाई के उपरांत माननीय न्यायालय द्वारा प्रकरण को अन्य पीठ/ब्रांच के समक्ष सूचीबद्ध किए जाने हेतु स्थानांतरित कर दिया गया। अब अगली तिथि पर मामले की पुनः सुनवाई नई पीठ के समक्ष होने की संभावना है। याचिकाकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद का नहीं बल्कि न्यायालय की गरिमा, विधि के शासन एवं सनातन धार्मिक परंपराओं की रक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रतिवादीगण के कृत्य “Direct Interference with Administration of Justice” की श्रेणी में आते हैं, जो अवमानना न्यायालय अधिनियम, 1971 के अंतर्गत दंडनीय हैं। वादी पक्ष ने माननीय उच्च न्यायालय से प्रतिवादियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही की मांग की है। मामले को लेकर धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों में भी व्यापक चर्चा बनी हुई है।












