HomeHealth & Fitnessमुख्यमंत्री के रचनात्मक दृष्टिकोण पर संघर्ष समिति ने किया स्वागत

मुख्यमंत्री के रचनात्मक दृष्टिकोण पर संघर्ष समिति ने किया स्वागत

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षामित्रों की बैठक में दिए गए इस वक्तव्य का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने कर्मचारियों से अपनी मांगों को मनवाने के लिए टकराव के बजाय सकारात्मक एवं रचनात्मक (Positive & Constructive) दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि वह प्रारंभ से ही इसी मार्ग पर चल रही है। पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित करने हेतु संघर्ष समिति ने सदैव शांतिपूर्ण, संयमित और जिम्मेदार तरीके से आंदोलन किया है।

इसके बावजूद यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। इससे ऊर्जा निगमों में अनावश्यक टकराव का वातावरण उत्पन्न हो रहा है, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की है।

संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने डाउन साइजिंग के नाम पर अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाला। मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद ऊर्जा निगम के संविदा कर्मी अभी तक आउटसोर्स निगम के अंतर्गत नहीं लाए गए हैं और उनका मनमानी ढंग से उत्पीड़न हो रहा है। नियमित कर्मचारियों के लिए अनुशासन सेवा नियमावली में संशोधन  करके बिना चार्ज शीट दिए, बिना सफाई का मौका दिए  सेवा से बर्खास्त करने का अधिकार ले लिया गया है। इससे ज्यादा उत्पीड़न की कार्यवाही और क्या हो सकती है, जिससे अनावश्यक  टकराव का वातावरण बन रहा है।

संघर्ष समिति ने बताया कि ध्यानाकर्षण आंदोलन के तहत पिछले 525 दिनों से बिजली कर्मचारी कार्यालय समय के बाद अथवा भोजनावकाश के दौरान ही विरोध सभाएं कर रहे हैं। आंदोलनरत रहते हुए भी कर्मचारियों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया है। विशेष रूप से जनवरी–फरवरी 2025 में महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर कर्मचारियों ने अद्वितीय कार्य किया, जिसकी देश-विदेश में सराहना हुई और उत्तर प्रदेश सहित भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी।

संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि पूरे आंदोलन के दौरान यह सुनिश्चित किया गया है कि उपभोक्ताओं एवं किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उनकी समस्याओं का समाधान हर परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि संविदा कर्मियों, कर्मचारियों एवं अभियंताओं के हितों की रक्षा तथा निजीकरण के विरोध में भी पूरी तरह सकारात्मक एवं रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया है—ठीक उसी भावना के अनुरूप, जैसा मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा है।

किन्तु यह अत्यंत खेदजनक है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने इस सकारात्मक दृष्टिकोण को नजरअंदाज करते हुए लगातार दमनात्मक कार्रवाइयां की हैं। दिनांक 19 मार्च 2023 को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा जी द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं पर की गई कार्रवाइयां अब तक वापस नहीं ली गई हैं, बल्कि नई कार्रवाइयां की जा रही हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन जानबूझकर टकराव का वातावरण बना रहा है।

संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस मामले में प्रभावी हस्तक्षेप करें, जिससे बिजली कर्मचारियों को न्याय मिल सके। साथ ही अब तक आंदोलन के दौरान की गई सभी दमनात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए तथा ऊर्जा मंत्री के निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही समाप्त की जाए।

संघर्ष समिति ने दोहराया कि बिजली कर्मचारी हर परिस्थिति में प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, किंतु प्रबंधन का रवैया लगातार तनाव और टकराव को बढ़ावा दे रहा है, जिसे तत्काल रोका जाना आवश्यक है। उत्पीड़न के विरोध में चल रहे प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान के अंतर्गत  आज औरैया एवं इटावा में सभाएं आयोजित की गईं, जिन्हें मुख्य रूप से जितेंद्र सिंह गुर्जर एवं महेंद्र राय ने संबोधित किया।

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