लखनऊ। तकरीबन एक पखवारे से भीषण गर्मी का असर बरकरार है। नौतपा ने तो गर्मी को और तीखी कर दी। इसी बीच ईंधन का दाम भी बढ़ गये है जिससे जरूरी सामानों के दामों में दस से बीच प्रतिशत तक बृद्धि हो गयी। वहीं चिपचिपाती गर्मी के बीच बाजारों में सन्नाटा बढ़ता जा रहा है। हर तरह की दुकानदारी प्रभावित होकर 30 प्रतिशत ही रह गयी है, जबकि सरार्फा बाजारों की रौनक ही गायब हो गयी अब लोग खरीददारी करने नहीं बल्कि मरम्मत कराने आ रहे हैं। वहीं व्यापारी संगठनों का कहना है कि सरकार इंघन के दामों में कमी करे तभी बाजारों में रौनक लौटेगी।
भीषण गर्मी ने लोगों की आवाजाही बेहद कम हो गयी है। हमेशा ग्राहकों की भीड़ से गुलजार रहने वाले बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है। शाम को कुछ लोगों की आवाजाही होती है वह भी घूमने के लिए न कि खरीदारी के लिए। शाम को कुछ ग्राहक बाजार पहुंचते हैं, लेकिन उससे भी कारोबार को खास राहत नहीं मिल पा रही। कपड़ा, किराना, सराफा और स्पोर्ट्स सामान समेत लगभग हर सेक्टर के कारोबारी नुकसान झेल रहे हैं। कई दुकानदारों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए दुकान बंद करने का समय भी बढ़ा दिया है। वहीं, लगातार हो रही बिजली कटौती से व्यापारियों की परेशानी और बढ़ गई है।
व्यापारी नेता सुरेश छाबलानी ने बताया कि पहले जहां रोजाना 50 से 60 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती थी, वहीं अब यह घटकर 10 से 15 हजार रुपये तक रह गई है। इतनी कम बिक्री में दुकानों का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। इसी तरह स्पोर्ट्स दुकानदार ने बताया कि महंगाई के बीच ग्राहकों की कमी ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। शाम को कुछ ग्राहक आते हैं, लेकिन उससे कारोबार संभल नहीं पा रहा। पंखा, एसी और बिजली का खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है। हर दिन 70 से 80 फीसदी तक नुकसान झेलना पड़ रहा है। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ना स्वाभाविक है, जिसके कारण सभी प्रकार के भाड़े एवं ट्रांसपोर्ट दरों में वृद्धि हो रही है। इसका असर खाने-पीने की वस्तुओं, कपड़ों तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं सहित लगभग हर क्षेत्र पर दिखाई देने लगा है। पेट्रोल व्यापारी का कहना है कि सरकार को पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई कीमतों पर पुनर्विचार करना चाहिए। ईंधन दरों में कमी आने से ट्रांसपोर्ट लागत नियंत्रित होगी, महंगाई पर लगाम लगेगी और बाजारों में रौनक बढ़ेगी।
लखनऊ सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्रनाथ रस्तोगी ने बताया कि गर्मियों में लोग घूमने बाहर चले जाते हैं, मलमास का असर भी बाजार पर पड़ा है । शादियों से पहले मिलने वाले चांदी के गिफ्टिंग आइटम के आॅर्डर भी अब लगभग बंद हो गए हैं। फिलहाल सराफा बाजार में सिर्फ 15 से 20 फीसदी कारोबार ही बचा है। सब्जी एवं फल व्यापारी अमित भट्ट का कहना है कि इनके दामों में 20 से 30 प्रतिशत तक बृद्धि होने से बिक्री कम हो रही है। गर्मी के कारण फल एवं सब्जियां जल्दी खराब होने से नुकसान हो रहा है। वहीं आटो मोबाईल सेक्टर के रवि शर्मा ने बताया कि बीते एक माह से कारोबार दम तोड़ रहा है।
कपड़ा व्यापारी का कहना है कि कुछ दिनों गर्मी के कारण बाजार में सन्नाटा पसरा है। व्यापारियों को बकरीद से कारोबार बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंच रहे। शाम को थोड़ी रौनक बढ़ती है, इसलिए दुकानों का समय रात को बढ़ा दिया गया है। आॅनलाइन कारोबार ने पहले ही व्यापारियों को कमजोर कर दिया था, अब गर्मी ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।












