HomeHealth & Fitnessविधानसभा: चर्चा से दूर, आरोपों की बौछार 

विधानसभा: चर्चा से दूर, आरोपों की बौछार 

लखनऊ। सूबे की सबसे बड़ी पंचायत यानी विधानसभा में जब सत्र आयोजित होता है तो सदस्यों को अपने क्षेत्र के उन मुद्दों को रखने का मौका मिलता है, जिसका सामान्यत: वह कहीं जिक्र नहीं  कर पाते। क्योंकि सत्र के दौरान सरकार एवं लगभग सभी विभागों के प्रमुख अफसर मौजूद रहते हैं। किंतु बीते कुछ वर्षो से सदन की शुरुआत हंगामे के साथ होती आ रही है। ऐसा ही सोमवार को मानसून सत्र के  पहले दिन दिखा। सार्थक एवं जनहित के मुद्दों पर नहीं बल्कि पक्ष एवं विपक्ष के मध्य आरोप- प्रत्यारोंपों के बौछारों के बीच शक्ति प्रदर्शन होता रहा। 
विधानसभा में आज आजमगढ़ के सपा विधायक आलम बदी को श्रद्धाजंलि अपर्ति की गयी। इस पर नेता सदन एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय सहित सभी दलीय नेताओं ने शोक संवदेना व्यक्त करते हुए अपने विचार रखे। इसके उपरांत परंपरा के अनुसार सदन की कार्यवाही 4 अगस्त को सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गयी है। इससे पूर्व सपा सदस्य विधानभवन परिसर में पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर प्रदर्शन करते रहे। उन्होंने राम मंदिर में चंदा चोरी पेपर लीक जैसे कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ नारे बाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया।

इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानभवन पोर्टिकों में सपा पर तीखा हमला बोला। कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर निर्माण में एक रुपया दान नहीं दिया और जयश्रीराम बोलने पर लाठियां तथा करसेवा करने पर गोली चलाने वाले चंदा चोरी की बात कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर मुद्दे पर सदन में चर्चा करने को तैयार है। इस तरह विधानभवन परिसर में दोपहर गहमा गहमी बनी रही। खास बात यह रही कि जनहित एवं विकास से जुड़े मु्दों पर न तो सत्ता पक्ष ने चर्चा  किया और न हीं विपक्ष ने। लोकसभा जैसा दृश्य यहां विधानसभा में देखने को मिला।

सूत्रों के अनुसार प्रमुख विपक्षी दल सपा कल मंगलवार को सदन में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है। हालाकि कल सरकार अनुपूरक बजट सहित कई विधेयकों को सदन में पेश करेगी। वहीं जनता इस हंगामे को ठीक नहीं मानती उसका मानना है कि जनहित एवं विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, आरोप प्रत्यारोप के लिए बहुत से मंच है। चार दिवसीय इस सत्र का अधिकांश समय तो हंगामे में निकलना गलत है। 

 राजस्व अदालत गठन की मांग 
 विधान परिषद में भाजपा सदस्य विजय बहादुर पाठक ने प्रदेश में लोक अदालत की तर्ज पर राजस्व जन अदालत की मांग रखी। घरौनी का वितरण हो या भूमि विवाद संबंधित प्रकरण अधिकारियों की जवाबदेही तय कर समाधान निकाले जा रहे है । किन्तु नामांतरण, बटवारा, सीमांकन, कब्जा, बेदखली सर्वजनिक सम्पतियों पर अवैध ढंग से कब्जे आदि से संबंधित वाद बडी़ संख्या में लंम्बित हैं। इन मामलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश है किन्तु उपजिलाधिकारी, तहसीलदार नायब तहसीलदारों पर अत्यधिक प्रशासनिक दायित्वों के कारण वर्षों से लंबित वादों के निस्तारण की गति मंद है। उन्होंने कहा कि कई बार भूमि संबंधीत विवाद इस सीमा तक बढ जा रहे है कि वे कानून व्यवस्था तक के लिए चुनौती बन जाते है। प्रदेश में राजस्व न्यायालयों में लंम्बित वादों के समयबद्ध निस्तारण के लिए लोक अदालत की तर्ज पर राजस्व जन अदालत शुरू करने की आवश्यकता है। 

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