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डीजीपी की हाईलेवल क्राइम मीटिंग, जनसुनवाई से लेकर सोशल मीडिया मॉनिटरिंग तक दिए सख्त निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने पुलिस मुख्यालय में प्रदेशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक कर कानून-व्यवस्था, जन शिकायतों के निस्तारण, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और गंभीर अपराधों पर नियंत्रण को लेकर अहम निर्देश दिए।

ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस बैठक में जोनल एडीजी, पुलिस आयुक्त, आईजी, डीआईजी, एसएसपी और एसपी स्तर के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में जन शिकायतों एवं IGRS प्रकरणों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, विवेचनाओं की समयबद्धता, ई-साक्ष्य, ई-समन, सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की समीक्षा की गई।

डीजीपी ने निर्देश दिए कि थाना और चौकी स्तर पर नियमित जनसुनवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों की शिकायतों का त्वरित और संतोषजनक समाधान हो सके। महिला एवं पारिवारिक मामलों के निस्तारण में मिशन शक्ति केंद्रों की भूमिका को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

संवेदनशील घटनाओं को लेकर डीजीपी ने कहा कि पुलिस तत्काल कार्रवाई करे और मीडिया को तथ्यात्मक एवं समयबद्ध जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचकर प्रभावी पर्यवेक्षण करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को दुष्प्रेरित करने वाले नेटवर्क और जातीय वैमनस्य फैलाने वाले तत्वों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया। एटीएस द्वारा हाल में पकड़े गए मामलों का जिक्र करते हुए डीजीपी ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीमों को और अधिक तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर बल दिया।

डीजीपी ने हाल ही में नियुक्त 60,244 नवआरक्षियों को उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए “Once in a Generation Opportunity” बताते हुए कहा कि उन्हें बीट पुलिसिंग, फुट पेट्रोलिंग और जनसंवाद में अधिकतम इस्तेमाल किया जाए। साथ ही उनके व्यवहारिक प्रशिक्षण, आवास और मेस व्यवस्था की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए गए।

गोकशी, गो-तस्करी, हत्या और लूट जैसी गंभीर घटनाओं पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने और बीट सूचना प्रणाली को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में ई-साक्ष्य एवं SID लिंकिंग की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी जनपदों को इसमें और सुधार के निर्देश दिए गए। वहीं गिरफ्तारी के दौरान बीएनएसएस के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए गए।

इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए ZFD योजना और ट्रैफिक जाम कम करने के लिए C-RTC योजना की समीक्षा करते हुए इनके बेहतर क्रियान्वयन पर बल दिया गया

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