लखनऊ। आजादी के बाद पहली बार बंगाल में मिली ऐतिहासिक जीत को लेकर भाजपा उत्साहित है। अब भाजपा का पूरा फोकस देश के सबसे बड़े राज्य यूपी पर है। शायद इसीलिए विधान सभा चुनाव से करीब 8 माह पहले आज योगी सरकार के दूसरे मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया गया। इसमें एक ब्राह्मण, 3 ओबीसी और दो दलित चेहरों को सरकार में मंत्री बनाया गया। साथ ही दो मंत्रियों का कद भी बढ़ा दिया गया।
प्रदेश सरकार में आज कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने वाले सपा के बागी मनोज पाण्डे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इनका रायबरेली अमेठी में प्रभाव है। इसी तरह भूपेन्द्र चौधरी को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इनका संगठन में कार्य करने खासा अनुभव है। मुरादाबाद सीट लोकसभा चुनाव में सपा को मिली थी। पहली बार राज्य मंत्री बनी कृष्णा पासवान कई बार से विधायक है, उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्री से लेकर विधायक तक का सफर तय किया। फतेहपुर के आस पास दलितों में पकड़ है। इसी तरह कासी के हंसराज विश्वकर्मा को भी राज्य मंत्री बनाया गया इनकी शिल्पकारों में मजबूत पकड़ और ईमानदार छवि है। इसी तरह कैलाश राजपूत कन्नौज के तिर्वा से जीते है। सपा के गढ़ में ओबीसी में मजबूत पकड़ है। सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ से विधायक है। आसपास के क्षेत्रों में इनके परिवार की बेहतर छवि है।
सरकार में शामिल अजीत पाल को राज्य मंत्री से स्वतंत्र प्रभार देकर पल समाज को भाजपा ने संदेश देने का कार्य किया। सोमेन्द्र तोमर को भी राज्य मंत्री से स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। इस तरह योगी सरकार में मंत्रियों की संख्या 60 हो गई। इसमें स्वर्णों की संख्या 25 हो गई। जबकि ओबीसी मंत्रियों की संख्या 25 और दलितों की संख्या 10 है। अल्पसंख्यक 2 और एक आदिवासी मंत्री शामिल हो गए।इस तरह भाजपा ने सपा के पीडीए की काट के ओबीसी और एससी पूरा जोर दिया है जिससे गत लोकसभा चुनाव जैसे हालात 2027 में न बन सके।
जातीय खांचे में फिट नहीं पूजा पाल व राजेश्वर सिंह…!
योगी सरकार के इस दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में सपा की बागी विधायक पूजा पाल के मंत्री बनने के कयास लग रहे थे लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। उनके स्थान पर राज्य मंत्री अजीत पाल को राज्य से स्वतंत्र प्रभार दे दिया गया। इसी तरह पुलिस अधिकारी से राजनेता बने राजेश्वर सिंह को भी मौका नहीं मिला उनके स्थान पर सोमेन्द्र तोमर का कद बढ़ा दिया गया।
घटिया सड़क पर फावड़ा चलाकर सुर्खियों में आईं थीं कृष्णा…!
फतेहपुर की खागा सुरक्षित सीट से विधायक कृष्णा पासवान का नाम भी शामिल है। वह यहां से लगातार तीन बार 2012, 2017 और 2022 से चुनाव जीत रही हैं। पहली बार वह किशनपुर सुरक्षित सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची थीं। वह हाईस्कूल पास हैं। राजनीति में उतरने से पहले वह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम करती थीं। दलित समुदाय से आने वाली कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर भाजपा ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है।वे आमजन की खातिर सड़क पर उतरने के लिए जानी जाती हैं। सड़क निर्माण घटिया होने पर खुद फावड़ा लेकर उतर पड़ी थी, बोली थी,काम तो सही और ईमानदारी से ही करना पड़ेगा।












