HomeHealth & Fitnessमदर्स-डे पर एडीएम गंभीर सिंह की भावुक अभिव्यक्ति बनी चर्चा का विषय

मदर्स-डे पर एडीएम गंभीर सिंह की भावुक अभिव्यक्ति बनी चर्चा का विषय

गाजियाबाद/आजमगढ़। कुछ शब्द सिर्फ लिखे नहीं जाते… वे सीधे दिल से निकलकर लोगों की आत्मा को छू जाते हैं। मदर्स-डे के अवसर पर आजमगढ़ में तैनात एडीएम एफ.आर. गंभीर सिंह द्वारा अपने माता-पिता को याद करते हुए लिखी गई भावनात्मक पोस्ट कुछ ऐसी ही रही, जिसने हर पढ़ने वाले की आंखें नम कर दीं।

उन्होंने अपनी माँ को याद करते हुए लिखा—’माँ, आज आप हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आपका प्यार, संस्कार और यादें हर पल हमारे साथ हैं। आपकी ममता आज भी मेरे जीवन की सबसे बड़ी ताकत है।’

अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उन्होंने बेहद विनम्रता से कहा कि वह दोनों के बताए रास्ते पर चलने की कोशिश करते हैं, फिर भी अगर कहीं कोई कमी रह जाए तो उन्हें माफ कर दें। इन शब्दों में एक बेटे का प्रेम, संस्कार और संवेदनाएं साफ झलकती हैं।

जहाँ तैनाती, वहाँ इंसानियत की छाप

संवेदनशील कार्यशैली ने दिलों में बनाई खास जगह एडीएम एफ.आर. गंभीर सिंह उन चुनिंदा प्रशासनिक अधिकारियों में गिने जाते हैं, जिनकी पहचान सिर्फ कुर्सी से नहीं बल्कि व्यवहार और संवेदनशीलता से होती है। कहा जाता है कि अच्छे संस्कार इंसान को बड़ा बनाते हैं और गंभीर सिंह का व्यक्तित्व इसी का जीता-जागता उदाहरण है।

गाजियाबाद में बतौर एडीएम सिटी तैनाती के दौरान उन्होंने शिक्षा, जनसेवा और जरूरतमंदों की मदद को लेकर जो कार्य किए, वह आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। गरीबों और असहाय लोगों के प्रति उनकी संवेदनशील सोच ने उन्हें आम जनता के दिलों में खास जगह दिलाई।

हर फरियादी को मिलता अपनापन

धैर्य से सुनना और निष्पक्ष निर्णय बनी पहचान गंभीर सिंह की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि वह हर व्यक्ति की बात को धैर्यपूर्वक सुनते हैं और सही-गलत का निष्पक्ष मूल्यांकन कर निर्णय लेते हैं। यही कारण है कि जनता के बीच उनकी छवि एक ईमानदार, सहज और जनहितैषी अधिकारी की बनी हुई है।

श्रद्धांजलि नहीं, संस्कारों का सम्मान

माँ-बाप को समर्पित शब्दों ने लोगों को किया भावुक मदर्स-डे पर लिखी गई यह पोस्ट केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उन संस्कारों और मूल्यों का सम्मान है, जो एक इंसान को बेहतर अधिकारी और बेहतर इंसान बनाते हैं। ऐसे संवेदनशील और कर्मठ अधिकारियों पर समाज को गर्व होना स्वाभाविक है।

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