HomeHealth & Fitness23 मई को कौशाम्बी में होगा गौ रक्षा आंदोलन का महाशंखनाद

23 मई को कौशाम्बी में होगा गौ रक्षा आंदोलन का महाशंखनाद

 

कौशाम्बी। जनपद में गौ रक्षा और सनातन संस्कृति के समर्थन में बड़ा धार्मिक जनजागरण अभियान शुरू होने जा रहा है। जिला पंचायत स्थित रत्नावली सभागार में सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में 23 मई को प्रस्तावित पूज्य ज्योर्तिमठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की “गविष्ठी गौ रक्षार्थ यात्रा” को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की गई।प्रेस वार्ता में कहा गया कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गौ माता की प्रतिष्ठा, संरक्षण और सनातन परंपरा के पुनर्जागरण का राष्ट्रीय अभियान है। यात्रा को लेकर जिले में व्यापक जनसंपर्क और तैयारियां तेज कर दी गई हैं।कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि पूज्य धर्म सम्राट स्वामी करपात्री महाराज द्वारा वर्ष 1966 में प्रारंभ किए गए ऐतिहासिक गौ रक्षा आंदोलन और धर्मयुद्ध को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया गया है। इसी उद्देश्य से तीर्थराज प्रयाग में 12 फरवरी 2025 को आयोजित “गौ प्रतिष्ठा महायज्ञ” में 2 करोड़ 78 लाख आहुतियां दी गई थीं। इसके बाद महाराष्ट्र के मुंबई चातुर्मास में आयोजित महायज्ञ में 3 करोड़ 68 लाख आहुतियां अर्पित की गईं। आयोजकों ने इसे गौ माता की कृपा और जनआस्था का प्रतीक बताया।प्रेस वार्ता में कहा गया कि गौ प्रतिष्ठा आंदोलन के तहत पूरे देश में गौ ध्वज स्थापना अभियान चलाया गया है। वृंदावन से गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हुए दिल्ली तक पदयात्रा कर गौ माता के महत्व और भारतीय संस्कृति में उनके स्थान को जन-जन तक पहुंचाया गया।वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन की ओर से उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्षों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया। गौ संरक्षण और गौ प्रतिष्ठा के मुद्दे पर सभी को आमंत्रित भी किया गया, लेकिन किसी स्तर पर ठोस सकारात्मक पहल सामने नहीं आई।उन्होंने आरोप लगाया कि 17 मार्च 2025 को रामलीला मैदान में प्रस्तावित “गौ प्रतिष्ठा महासभा” को अनुमति न देकर गौ रक्षा की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया।पत्रकार वार्ता में मीडिया से अपील की गई कि गविष्ठी गौ रक्षार्थ यात्रा को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए इसे गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाया जाए। वक्ताओं ने कहा कि गौ रक्षा केवल धार्मिक विषय नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है।उन्होंने मांग उठाई कि केंद्र और राज्य सरकारें गौ माता को “राष्ट्र माता” घोषित करें तथा गौवंश संरक्षण के लिए कठोर कानून लागू करें। वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए सख्त प्रावधान हैं, उसी प्रकार गौवंश की रक्षा और संवर्धन के लिए भी प्रभावी कानून बनाए जाने चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 48 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि गौ हत्या रोकने और गौ संरक्षण की मूल भावना संविधान के नीति निदेशक तत्वों में स्पष्ट रूप से निहित है।प्रभारी एवं गोवर्धनमठ के परिकर शिष्य सचिन द्विवेदी ने बताया यह यात्रा 3 मई से गोरखपुर से प्रारंभ हुई है। इसी कम में  23 मई को शंकराचार्य जी की यात्रा का प्रवेश दुर्गा भाभी सेतु से होगा। इसके बाद यात्रा शहजादपुर होते हुए कड़ा धाम स्थित मां शीतला धाम, संत मलूकदास की तपस्थली सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पहुंचेगी।गविष्ठी गौ रक्षार्थ यात्रा के दौरान सिराथू, मंझनपुर और चायल विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। यात्रा का रात्रि विश्राम रामजानकी मंदिर, सिकंदरपुर बजहा में निर्धारित किया गया है।उन्होंने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज, सरकार और न्यायपालिका की संयुक्त सहभागिता से गौ माता की प्रतिष्ठा और संरक्षण सुनिश्चित करना है।

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