*भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ठूठीबारी-झरही नदी तटबंध की सड़क, साल भर में ही उखड़ी विकास की परतें।*
*राहगीर परेशान: पक्की सड़क अब बनी ‘गिट्टियों का जाल’, जिम्मेदार साधे हैं चुप्पी।*
रिपोर्ट:विनय कुमार गुप्त।
महराजगंज (निचलौल)।
सरकार की ओर से ग्रामीण इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के दावे ठूठीबारी में धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। निचलौल तहसील के ठूठीबारी से निकलने वाली झरही नदी के तटबंध पर पिछले वर्ष निर्मित पक्की सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। आलम यह है कि निर्माण के महज एक साल के भीतर ही सड़क से डामर गायब हो चुका है और अब वहां सिर्फ नुकीली गिट्टियां बची हैं, जो राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं।
*कार्यदायी संस्था की लापरवाही उजागर।*
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के समय कार्यदायी संस्था ने मानकों को ताक पर रखकर काम किया। घटिया निर्माण सामग्री और डामर की बेहद कम मात्रा के कारण पहली कुछ बारिशों ने ही सड़क की सूरत बिगाड़ दी। आज स्थिति यह है कि पक्की सड़क और ऊबड़-खाबड़ पगडंडी में फर्क करना मुश्किल है। राहगीरों का कहना है कि “विकास के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है।”
*जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से आक्रोश।*
हैरानी की बात यह है कि इस मार्ग से आए दिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का आवागमन होता है, बावजूद इसके किसी ने भी इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब जनता की इस तकलीफ पर ‘मौन’ साधे हुए हैं। जनप्रतिनिधियों की यह उदासीनता क्षेत्र के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
*राहगीरों की मुसीबत: हादसों को दावत देती गिट्टियां।*
झरही नदी तटबंध मार्ग से गुजरने वाले राहगीर और दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक परेशान हैं। सड़क पर बिखरी नुकीली गिट्टियों के कारण आए दिन लोग फिसल कर चोटिल हो रहे हैं। टायरों के फटने और वाहनों के खराब होने का सिलसिला भी आम हो गया है। विशेषकर रात के समय इस मार्ग पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं है।
*स्थानीय मांग।*
क्षेत्र की जनता ने जिलाधिकारी और संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था के खिलाफ सख्त जांच हो।घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।तथा जल्द से जल्द मार्ग की मरम्मत कराकर उसे चलने योग्य बनाया जाए।यदि समय रहते इस सड़क की सुध नहीं ली गई, तो आने वाले मानसून में यह मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार और जनहित की समस्या पर क्या संज्ञान लेता है।












