- काकोरी के बाग़बान बोले, मौसम के उतार चढ़ाव से पेड़ों पर गुच्छों में आम एकदूसरे से चिपके
लखनऊ, काकोरी। काकोरी माल मलिहाबाद फ़लपट्टी क्षेत्र घोषित होने के साथ यहां के आम बागवानों का जीवनयापन आम की फसल से अर्जित की गई आय पर ही निर्भर है। वर्तमान समय में आम की फसल परिपक्वता की कगार पर लगी है। कुछ सप्ताह बाद आम की टूट शुरू होने के साथ फलों का राजा आम जल्द ही कई अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपनी दस्तक देने वाला ही है परंतु इस समय परिपक्व खड़ी आम की फसल को कई प्रकार के रोगों ने घेर लिया है जिससे आम बागवान चिन्तित नजर आ रहे है, काकोरी माल मलिहाबाद क्षेत्र के अमेठिया सलेमपुर, कसमंडी,रसूलपुर,नबीपनाह, शिरगामऊ,मीठेनगर,जमालनगर, मड़ौली, गौदामुज्जमनगर, मनकौटी, ईशापुर,हलवापुर, कटौली,बनियाखेड़ा, सहित तमाम फ़लपट्टी क्षेत्रों में रोगों से ग्रसित हुई आम की फसलों को देखा जा सकता है। जिससे आम बागवान अपनी फसलों के प्रति चिंतित नजर आ रहे है।
मलिहाबाद के अल्लुपुर गांव निवासी आम बागवान नसीर अहमद ने बताया कि मेरे पास मलिहाबाद और काकोरी में कई बीघे आम की फसल है, जिसमें इस समय लासी, कटर कीड़ा सहित अन्य रोग आम के फलों में लगें है।

यदि जल्द दवाई का स्प्रे नहीं करूंगा तो नुकसान होना सम्भव है। वही काकोरी के आम बागवान मोहम्मद शरीफ ने बताया कि मौसम के उतर चढ़ाओ के चलते रोग आम की फसल में लग रहा है आम के गुच्छों में जो आम एक दूसरे में चिपके हैं वह फल स्वतः खराब होकर गिर रहे है अभी जल्द ही दवाई का स्प्रे करवाया हु तो रोकथाम हुआ है।
इस सम्बन्ध में केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक पीके शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में आम की फसल का यह समय जो चल रहा है अप्रैल से लेकर अंत तक जब तक आम की तुड़ाई नहीं शुरू होती हैं तब तक तीन से चार प्रकार के रोग कच्चे आम में लगते है,आम बागवान दवाई का छिड़काव करें बस किसानों की चाहिए की तेज धूप में छिड़काव करने से बचे और भूंगा और लाशी के लिए आम बागवान केवल पानी से ही पेड़ो पर स्प्रे करे, इससे लाशी को खत्म किया जा सकता है।












