लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा निर्णय घोषित किए जाने के बाद से ऊर्जा निगमों में कार्य का वातावरण लगातार बिगड़ता जा रहा है। निजीकरण थोपने की कोशिशों के साथ-साथ बिजली कर्मियों पर लगातार दमनात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की जा रही हैं, जिससे पूरे विभाग में भय, असंतोष और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
.jpeg)
संघर्ष समिति ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्षों के दौरान बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियंताओं का निरंतर उत्पीड़न किया गया है। शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्यवाहियां, स्थानांतरण, निलंबन तथा मानसिक दबाव जैसी कार्रवाइयों ने ऊर्जा निगमों में अघोषित आपातकाल जैसा माहौल पैदा कर दिया है। इसका प्रतिकूल प्रभाव विकास कार्यों एवं विद्युत व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन तथा वर्तमान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के नाम पर बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि बिजली कर्मियों का मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास है। बिजली कर्मियों ने उनके नेतृत्व में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और आगे भी पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु कार्य करते रहेंगे।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के समस्त बिजली कर्मियों से आह्वान किया है कि निजीकरण विरोधी आंदोलन के दौरान उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित एवं सर्वोच्च प्राथमिकता पर समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 535वें दिन आज प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मियों द्वारा व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा गया।












