नई दिल्ली। इंटरनेट की दुनिया में एक ऐसा तूफान आने वाला है, जो डाउनलोडिंग और स्ट्रीमिंग की पूरी परिभाषा ही बदल देगा। दरअसल जापान के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा 6G प्रोटोटाइप डिवाइस तैयार किया है, जिसने वायरलेस इंटरनेट की दुनिया में तहलका मचा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह दुनिया का पहला 6G डिवाइस है। इस नई तकनीक की मदद से वैज्ञानिक 112 Gbps की वायरलेस इंटरनेट स्पीड हासिल करने में कामयाब रहे। यह इंटरनेट स्पीड 5G नेटवर्क से करीब 20 गुना से भी ज्यादा तेज है। इस खबर पर कांग्रेस ने आरोप लगाते हुये कहा है कि भारत के लोग मंदिर के नीचे मंदिर की तलाश में व्यस्त हैं, दुनिया तरक्की के रास्ते पर है।
कैसे हासिल की इतनी रफ्तार?
अभी तक वैज्ञानिक सुपरफास्ट 6G नेटवर्क बनाने के लिए बहुत हाई फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, साधारण इलेक्ट्रॉनिक सर्किट एक सीमा के बाद जवाब दे जाते हैं। जब सिग्नल की फ्रीक्वेंसी 350 GHz के पार जाती है, तो डेटा में बहुत ज्यादा डिजिटल शोर (Phase Noise) आने की वजह से वह काम का नहीं रहता।
जापान की तोकुशिमा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ताकेशी यासुई और उनकी टीम ने इस पुरानी इलेक्ट्रॉनिक लिमिट को पूरी तरह खत्म कर दिया। उन्होंने 560 GHz के बैंड पर बिना किसी रुकावट के 112 Gbps की ऐतिहासिक वायरलेस स्पीड हासिल करके दुनिया को चौंका दिया।
रोशनी की मदद से हासिल की स्पीड
इस काम को मुमकिन बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक सर्कट को की जगह लाइट यानी रोशनी (Photonics) का इस्तेमाल किया। इसमें सबसे खास भूमिका ऑप्टिकल माइक्रोकॉम्ब नाम के एक छोटे से डिवाइस ने निभाई।
यह डिवाइस हाई-टेक लेजर रूलर की तरह काम करता है, जो प्रकाश की बेहद स्थिर और सटीक किरणें पैदा करता है। अब क्योंकि प्रकाश की ये किरणें एकदम स्थिर होती हैं, इसलिए इनमें डिजिटल शोर न के बराबर होता है। यही वजह है कि इसके जरिए बेहद साफ और शक्तिशाली टेराहर्ट्ज सिग्नल मिल पाते हैं, जो डेटा को बिना किसी रुकावट के सुपरफास्ट स्पीड से भेज पाते हैं।(REF.)
असल दुनिया के लिए प्रैक्टिकल डिवाइस
आमतौर पर देखा गया है कि लेजर और चिप वाली टेक्नोलॉजी में जरा सा भी वाइब्रेशन लेजर का अलाइनमेंट बिगाड़ देता है और इंटरनेट काम करना बंद कर देता है। इस परेशानी को जपानी वैज्ञानिकों की टीम ने ऑप्टिकल फाइबर को सीधे सिलिकॉन नाइट्राइड माइक्रोरेजोनरेटर चिप के साथ परमानेंट जोड़कर दूर किया।
इससे तीन फायदे हुए। पहला कि भारी-भरकम लैब सेटअप एक छोटी सी चिप में समा गया। दूसरा, लेजर का अलाइनमेंट बिगड़ने का खतरा हमेशा के लिए खत्म हो गया और तीसरा, इसमें खास तरह का तापमान कंट्रोलर लगाया है ताकि बाहर के बदलते मौसम का इस पर कोई असर न पड़े।












