HomeHealth & Fitnessप्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत सुभाषित में मातृभूमि की महिमा का किया वर्णन

प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत सुभाषित में मातृभूमि की महिमा का किया वर्णन

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमारी मातृभूमि साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्व-कल्याण की पुण्यभूमि रही है। उन्होंने कामना की कि महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पावन धरती सभी को सदैव सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रखे।

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, “यस्यां पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन् । गवामश्वानां वयसश्च विष्ठा भगं वर्चः पृथिवी नो दधातु ।।”

इस सुभाषित का अर्थ है कि जिस पवित्र धरती पर हमारे पूर्वजों ने महान कार्य किए, जिस भूमि पर देवताओं ने असुरों पर विजय प्राप्त की, जो भूमि गायों, घोड़ों और पक्षियों आदि समस्त जीवों का आश्रय है, वह पृथ्वी हमें ऐश्वर्य, सौभाग्य, तेज और समृद्धि प्रदान करे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हमारी मातृभूमि की महानता, समृद्धि और दिव्यता का वर्णन करता है। यह भूमि केवल आध्यात्मिक साधना की ही नहीं, बल्कि पराक्रम, शक्ति और लोककल्याण की भी आधारभूमि रही है।

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