- सेना के लिए 386 आधुनिक सुरंग खोजी उपकरण खरीदने की तैयारी
नई दिल्ली। सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों के सामने सबसे बड़ा खतरा कई बार जमीन के भीतर छिपे विस्फोटक साबित होते हैं। खासकर जम्मू-कश्मीर और अन्य संवेदनशील इलाकों में आतंकवादी अब ऐसे विस्फोटकों और बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें पारंपरिक धातु खोजी उपकरण आसानी से पकड़ नहीं पाते। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारतीय सेना अब नई पीढ़ी की अत्याधुनिक तकनीक अपनाने जा रही है।
रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए अत्याधुनिक दोहरी तकनीक वाले सुरंग खोजी उपकरण खरीदने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जानकारी के मुताबिक करीब 386 नए उपकरण खरीदे जाएंगे, जिन पर लगभग 290 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की तैयारी है। इन उपकरणों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि ये धातु के साथ-साथ प्लास्टिक, लकड़ी और चीनी मिट्टी जैसे पदार्थों से बने विस्फोटकों को भी खोज सकेंगे।
अब तक सेना जिन धातु खोजी उपकरणों का इस्तेमाल करती रही है, वे केवल धातु आधारित वस्तुओं का पता लगाने में सक्षम थे। लेकिन आतंकियों ने समय के साथ अपनी रणनीति बदल दी और गैर धातु विस्फोटकों का इस्तेमाल बढ़ा दिया। ऐसे विस्फोटक सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके थे क्योंकि सामान्य उपकरण उन्हें पहचान नहीं पाते थे। कई बार इसी वजह से जवानों को नुकसान भी उठाना पड़ा।
नई प्रणाली में पारंपरिक विद्युत चुंबकीय तकनीक के साथ जमीन के भीतर देखने वाली रडार और अवरक्त तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे जमीन के अंदर छिपी संदिग्ध वस्तुओं की अधिक सटीक पहचान संभव हो सकेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य के युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों में बेहद उपयोगी साबित होगी।
इस आधुनिक प्रणाली को हर प्रकार के मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। यह बफीर्ले इलाकों, रेगिस्तान, दलदली जमीन और पहाड़ी क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम करेगी। जानकारी के अनुसार यह लगभग 10 से 12 सेंटीमीटर गहराई तक छिपे विस्फोटकों को पहचानने में सक्षम होगी। छोटे आकार की बारूदी सुरंगें भी इसकी पकड़ से बच नहीं पाएंगी।
सैनिकों की सुविधा के लिए इसका वजन सीमित रखा गया है ताकि लंबे समय तक इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सके। इसमें ध्वनि और दृश्य दोनों प्रकार की चेतावनी प्रणाली होगी, जिससे जवानों को तुरंत खतरे की जानकारी मिल सकेगी। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय सेना लगातार आधुनिक तकनीकों को अपने तंत्र में शामिल कर रही है। मानव रहित विमान, उन्हें निष्क्रिय करने वाली प्रणालियों और आधुनिक हथियारों के बाद अब यह उच्च तकनीक वाली सुरंग खोजी प्रणाली सेना की सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगी। आने वाले समय में यह उपकरण सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों के लिए बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।












