Homeदेश (National)पाइपलाइन से रणनीतिक भंडार तक, होर्मुज संकट से कैसे निपट रही दुनिया?

पाइपलाइन से रणनीतिक भंडार तक, होर्मुज संकट से कैसे निपट रही दुनिया?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण ईंधन संकट खड़ा हो गया है। अभी यह तय नहीं है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कब खुलेगा। मगर दुनिया ने इसका विकल्प खोजना शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में यहां होने वाले किसी घटनाक्रम की वजह से ईंधन आपूर्ति बाधित न हो।

दूसरी तरफ खाड़ी देश भी उन विकल्पों पर विचार करने में जुटे हैं, जिनके सहारे होर्मुज की खाड़ी को बायपास किया जा सके। भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था अपने ईंधन आपूर्ति में विविधता ला रही है। पाकिस्तान भी रणनीतिक तेल भंडार बनाने पर विचार कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत में अपना तेल स्टोर करेगा।

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सऊदी अरब की पेट्रोलाइन: सऊदी अरब दुनिया का एक प्रमुख तेल उत्पादक देश है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करने की खातिर उसने पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को पूरी क्षमता से चलाने का फैसला लिया है। यह लाइन फारस की खाड़ी पर स्थित 1200 किमी लंबी यह पेट्रोलाइन अब्कैक और रास तानूरा ऑयल फील्ड से कच्चा तेल लाल सागर पर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। इस पाइप लाइन के सहारे सऊदी अरब पीना होर्मुज में दाखिल हुए दुनियाभर में तेल की आपूर्ति कर सकता है।

फुजैराह पाइपलाइन: संयुक्त अरब अमीरात ने भी राजधानी अबू धाबी से फुजैराह बंदरगाह तक एक पाइपलाइन तैयार की है। यहां से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करके भारत तक तेल भेजना आसान है। वहीं यूएई एक अन्य पाइपलाइन ओमान तक बना रहा है। इसके अगले साल तक शुरू होने का अनुमान है।

नई पाइपलान बनाने चाहते हैं तुर्किय और इराक

इराक और तुर्किये के बीच एक पाइपलाइन है। इसके माध्यम से भूमध्य सागर तक कच्चा तेल पहुंचाया जाता है। इस बीच तुर्किये ने नाटो ईंधन पाइपलाइन परियोजना का भी प्रस्ताव रखा है, ताकि नाटो के पूर्वी हिस्से में ईंधन की आपूर्ति को सुनिश्चित किया जा सके। उधर, इराक ने सीरिया के बनियास बंदरगाह तक एक नई तेल पाइपलाइन बनाने का प्रस्ताव रखा है। दरअसल, युद्ध के कारण इराक के तेल निर्यात में कमी आई है। अब बगदाद नई तेल पाइपलाइन बनाकर इसकी भरपाई करना चाहता है।

पाकिस्तान क्या कर रहा: पाकिस्तान ने इराक के साथ मिलकर हाल ही में ईरान के साथ एक डील की है। इसके तहत ईरान दोनों देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने में सहायता करेगा। उधर, पाकिस्तान सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने पर विचार कर रही है। मगर उसके सामने बजट आड़े आ रहा है। यही कारण है कि उसने खाड़ी देशों से पाकिस्तान में तेल भंडार स्थापित करने का आग्रह किया है।

भारत कौन से कदम उठा रहा: भारत ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के साथ रणनीतिक तेल भंडार की डील की है। इसके तहत यूएई भारत में अपना तेल भंडार बढ़ाएगा। साथ ही दोनों देशों ने एलपीजी भंडारण की संभावना को भी तलाशेंगे। भारत युद्ध से पहले 27 देशों से ईंधन खरीदता था, लेकिन युद्ध के बाद से 40 देशों से कच्चा तेल और गैस खरीद रहा है, ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके।

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वेनेजुएला के तेल पर निगाह

अमेरिका की निगाह वेनेजुएला के तेल पर है। मगर उसकी रिफाइनरी वेनेजुएला के तेल को साफ नहीं कर सकती हैं। उनके पास इतनी उन्नत तकनीक नहीं है। यही कारण है कि अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला से भारत तेल खरीदे, ताकि वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति को सुनिश्चित किया जा सके। शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। उससे पहले उन्होंने दावा किया कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते भारत का दौरा करेंगी। यहां तेल बेचने पर चर्चा करेंगी।

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