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ईरान के यूरेनियम पर है डोनाल्ड ट्रंप की नजर, समझिए क्या है प्लान

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध को एक महीना हो चुका है। यह युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सेना जमीनी हमला करती है, तो इसके जवाब में ईरान की सेना चुप नहीं रहेगी। इसके बावजूद अमेरिकी सेना अपने अभियान को सफल बनाने में जुटी हुई है। अमेरिकी सेना का मिशन है कि ईरान की राजधानी तेहरान के यूरेनियम पर कब्जा करे ताकि ईरान परमाणु बम न बना सके। इस मिशन के तहत लगभग 1,000 पाउंड यूरेनियम को कब्जे में लेने की योजना है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट मध्य पूर्व तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा अमेरिकी सेना जमीन पर भी सैनिक उतारने की रणनीति बना रही है। माना जा रहा है कि इस मिशन में कुछ दिन या उससे अधिक समय लग सकता है। साथ ही इस मिशन को सफल बनाने में अमेरिकी सैनिकों की जान भी जोखिम में है। अभी इस मिशन की रणनीति तय हो रही है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति ने इस मिशन को लेकर मंजूरी नहीं दी है।

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मिशन के बारे में अमेरिकी सेना ने क्या कहा?

अमेरिकी अधिकारियों ने मिशन के बारे में बताया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने मिशन पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। वह इस बात पर विचार कर रहे हैं कि अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए और ईरान को परमाणु हथियार बनाने से कैसे रोका जाए।

अगर इस ऑपरेशन को इजाजत मिलती है तो इसमें विशेष बलों के सैनिक शामिल हो सकते हैं, जो ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच परमाणु ठिकानों को सुरक्षित करेंगे और यूरेनियम को युद्ध क्षेत्र से बाहर निकालेंगे। कई जानकारों का मानना है कि यह मिशन आसानी से या जल्दी खत्म नहीं होगा।

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पेंटागन की तैयारी

पेंटागन (अमेरिका का रक्षा विभाग) ने मिशन के लिए दो स्तर की योजना बनाई है। पहला, छोटा ऑपरेशन, जिसमें केवल विशेष बलों के चुनिंदा जवान शामिल होंगे, जो सीधे परमाणु ठिकानों में घुसकर यूरेनियम को सुरक्षित करेंगे। अगर हालात बिगड़ते हैं तो पेंटागन 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को उतारने की तैयारी में है। यह अभियान हफ्तों तक चल सकता है और इसका उद्देश्य ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम करना होगा।

इस पूरे मिशन के केंद्र में ईरान के पास मौजूद लगभग 1,000 पाउंड यूरेनियम है। अमेरिकी रणनीति यह है कि किसी भी तरह इस सामग्री को ईरान से बाहर निकाला जाए, ताकि वह परमाणु बम न बना सके। यह केवल बमबारी जैसा नहीं है। रेडियोधर्मी सामग्री को सुरक्षित रूप से युद्ध क्षेत्र से बाहर निकालना तकनीकी और सुरक्षा की दृष्टि से दुनिया के सबसे खतरनाक ऑपरेशनों में से एक हो सकता है

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