सिद्धार्थनगर की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित घोटाले, फर्जी भुगतान और बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी का मामला सामने आया है। इस शिकायत के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। शिकायतकर्ता सुमेर चौधरी ने इस संबंध में साक्ष्यों के साथ उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजी है। इनमें ज्वाइंट कमिश्नर जीएसटी गोरखपुर, निदेशक पंचायती राज, लोकायुक्त और अपर मुख्य सचिव पंचायती राज विभाग शामिल हैं। यह शिकायत शनिवार को रजिस्ट्री के माध्यम से भेजी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शोहरतगढ़ विकासखंड की अगया, महमुदवाग्रांट, बगुलहवा, अतरी और खुनुवा सहित कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर संदिग्ध फर्मों को लाखों रुपये का भुगतान किया गया।
आरोपों के अनुसार, ‘पांडे कंस्ट्रक्शन’ नामक एक फर्म को विभिन्न ग्राम पंचायतों से भारी भुगतान प्राप्त हुआ है। इस फर्म का पता सिकरी बाजार लोटन बताया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस फर्म का कोई स्थायी प्रतिष्ठान या व्यवस्थित व्यापारिक ढांचा मौजूद नहीं है। सुमेर चौधरी ने यह भी आरोप लगाया है कि ‘पांडे कंस्ट्रक्शन’ सहित जिले के अलग-अलग विकासखंडों की कई अन्य फर्मों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। हालांकि, सरकार को देय जीएसटी जमा नहीं किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर कर चोरी हुई। शिकायतकर्ता ने ‘पांडे कंस्ट्रक्शन’ के अलावा बीआरके एसोसिएट्स, सागर ट्रेडर्स, वेदिका कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, एसआर ट्रेडिंग कंपनी, आकाश ट्रेडर्स और हर्षिता इंटरप्राइजेज जैसी अन्य फर्मों के खिलाफ भी साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि इन फर्मों के माध्यम से कागजी खरीद-फरोख्त दिखाकर सरकारी धन निकाला गया।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि जीएसटी नियमों की अनदेखी की गई है। इसके अलावा, कई भुगतान संदिग्ध परिस्थितियों में किए गए हैं, और कार्यों की गुणवत्ता व वास्तविकता भी जांच के दायरे में है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि विकासखंड स्तर के अधिकारियों, ग्राम पंचायत सचिवों और सहायक विकास अधिकारियों की मिलीभगत से पंचायतों में फर्जी भुगतान का खेल चलाया गया। आरोप है कि अपने चहेते ठेकेदारों और कथित फर्जी फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी धन का बड़े पैमाने पर बंदरबांट किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिन पंचायतों में लाखों रुपये के भुगतान दिखाए गए, वहां कई कार्य धरातल पर दिखाई तक नहीं देते, जबकि कागजों में भुगतान पूरा दर्शा दिया गया। पूरा मामला सामने आने के बाद पंचायत विभाग, जीएसटी विभाग और प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता ने शासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों, अधिकारियों और फर्म संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायतों में सरकारी धन के दुरुपयोग और कर चोरी के नेटवर्क का खुलासा हो सके।
सिद्धार्थनगर में करोड़ों के फर्जी भुगतान, जीएसटी चोरी का आरोप:पंचायत विभाग में शिकायत, शिकायतकर्ता ने की कार्रवाई की मांग
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