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श्रीमद् भागवत कथा में भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर झूमते नजर आये भक्तजन

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फिरोजाबाद। एस एच जे मॉर्डन स्कूल विभव नगर  प्रांगण में आयोजित “श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ” के चतुर्थ दिवस कथा स्थल श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत दिखाई दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ कथा आयोजक  ओमप्रकाश शर्मा द्वारा विधिवत पूजन एवं भव्य आरती के साथ किया गया, जिसके पश्चात परम पूज्य महामृत्युंजय पीठाधीश्वर महाकाल उज्जैन के स्वामी श्री प्रणवपुरी महाराज ने व्यासपीठ पर विराजमान होकर राजा बलि के प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि जब वामन भगवान राजा बलि से तीन पग भूमि मांगने पहुंचे, तब गुरु शुक्राचार्य जी ने उन्हें समझाया कि यह भगवान की परीक्षा एवं लीला है। किंतु राजा बलि ने सत्य एवं धर्म का मार्ग चुनते हुए कहा कि यदि स्वयं भगवान ब्राह्मण वेश में उनके द्वार पर आये हैं, तो उन्हें सब कुछ अर्पित करने में कोई संकोच नहीं है। उन्होंने कहा कि “सब कुछ खो देना स्वीकार है”। किंतु असत्य का भार स्वीकार नहीं।” महाराज श्री ने कहा कि जीवन में चाहे कितने भी संकट आये मनुष्य को धर्म एवं सत्य के मार्ग से कभी विचलित नहीं होना चाहिए। भगवान भक्त की परीक्षा अवश्य लेते हैं, किंतु उसकी निष्ठा एवं समर्पण से प्रसन्न होकर कृपा भी करते हैं। भगवान ने राजा बलि की धर्मपरायणता एवं दानशीलता से प्रसन्न होकर उन्हें इंद्र पद का वरदान प्रदान किया।
उन्होंने आगे महाराज मनु के वंश की कथाओं का वर्णन करते हुए राजा अम्बरीष के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राजा अम्बरीष राज-पाठ, वैभव एवं प्रतिष्ठा को क्षणभंगुर मानते हुए सदैव भगवान की भक्ति में लीन रहते थे। मनुष्य को पद, प्रतिष्ठा एवं धन प्राप्त होने पर अहंकार नहीं करना चाहिए, बल्कि भगवान के प्रति समर्पण भाव बनाए रखना चाहिए।
राजा निमि के प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने बताया कि जब ब्राह्मणों ने उनसे पुनः शरीर धारण करने का आग्रह किया, तब राजा निमि ने कहा कि जैसे जल में मछली को हर क्षण मृत्यु का भय बना रहता है। उसी प्रकार यह शरीर भी भय, मोह एवं दुखों से घिरा हुआ है। इसलिए उन्होंने पुनः शरीर धारण करने से इनकार कर दिया। तत्पश्चात देवताओं एवं ब्राह्मणों ने उन्हें मनुष्यों की पलकों में स्थान प्रदान किया। जिससे पलक झपकने में उनकी उपस्थिति का अनुभव होता है।
कथा के दौरान भगवान श्रीराम जन्मोत्सव एवं भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया। महाराज श्री ने बताया कि किस प्रकार राजा दशरथ ने वशिष्ठ  एवं श्रंगी ऋषि द्वारा यज्ञ संपन्न कराया, जिसके फलस्वरूप भगवान श्रीराम का अवतार हुआ। वहीं भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग पर पूरा कथा पंडाल भक्ति, उल्लास एवं जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह एवं धूमधाम से भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया। और बधाई महोत्सव पर टॉफी, बिस्कुट, खिलौने, व अन्य सामान प्रसाद के रूप में भक्तो के बीच लुटाया गया। और कथा पण्डाल में विराजमान महिलायों ने भगवान के जन्मोत्सव पर बधाई गाते हुए नृत्य किया, और गाते हुए कहा नन्द के आनंद भये, जय कन्हैया लाल की, हाथी दियो, घोड़ा दियो ओर दीनी पालकी ।

इस अवसर  सदर विधायक श्री मनीष असीजा जी ने महाराज  का सत्कार एवं सम्मान किया तथा कथा श्रवण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।  अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नैतिक मूल्यों एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति, मधुर भजन, भक्ति संगीत एवं “राधे-राधे” तथा “जय श्रीराम” के जयकारों से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना रहा तथा श्रद्धालुओं ने कथा एवं आरती में सहभागिता कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम में सदर विधायक मनीष असीजा, सुनील शर्मा, सत्यप्रिय गुप्ता,राम नरेश कटारा, मनोज शर्मा, कृपाशंकर मिश्रा, शिवम शर्मा, कौशल उपाध्याय, डॉ प्रभाकर राय एवं हरि प्रकाश शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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